क्या पंजाब में फिर लौट रहा है आतंकवाद का साया? बढ़ती वारदातों से गहराई चिंता
सुभाष आनंद – विनायक फीचर्स)
पंजाब में हाल के दिनों में जिस रफ्तार से आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या राज्य आतंकवाद जैसी स्थिति की ओर लौट रहा है? प्रदेश के 22 जिलों में तेजी से बिगड़ता कानून-व्यवस्था का हाल आम लोगों के मन में भय पैदा कर रहा है। पाकिस्तान सीमा से सटे फिरोजपुर में आरएसएस कार्यकर्ता नवीन कुमार अरोड़ा की दिनदहाड़े हुई हत्या ने इस डर को और गहरा कर दिया है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
चुनाव प्रचार के समय आप नेता मनीष सिसौदिया ने पंजाब को अपराध मुक्त बनाने का दावा किया था, लेकिन आज हालात पूरी तरह उलट दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, जिनके पास गृह विभाग भी है, उन पर स्थिति संभालने में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
हत्या के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर तथाकथित “शेरे पंजाब ग्रुप” द्वारा वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया, जिसमें लिखा था कि "जो सिखों के खिलाफ बोलेगा, उसका यही हश्र होगा।” हालांकि, पंजाब की आतंकवाद-रोधी एजेंसियों ने ऐसे किसी संगठन के अस्तित्व से इंकार किया है और इसे शरारती तत्वों की साजिश बताया है।
हत्या के पीछे संगठित नेटवर्क के संकेत
सूत्रों के अनुसार हत्या में शामिल कुछ युवक पहले शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में काम कर चुके थे। पुलिस के हाथ एक ‘बादल’ नामक युवक का सुराग लगा है, जिसके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही यह भी सामने आया है कि वारदात की योजना एक जन्मदिन पार्टी में बनाई गई थी, जहां शूटरों को 20-20 हजार रुपये दिए गए थे।
पंजाब में अवैध हथियारों का जाल तेजी से फैल चुका है—बताया जाता है कि इनकी संख्या वैध लाइसेंसों से कई गुना अधिक हो चुकी है। कई बस्तियों में तलाशी अभियान चलाया जाए तो ट्रकों भर हथियार मिलने की आशंका जताई जा रही है। सूत्र यह संकेत भी दे रहे हैं कि हथियार अब बाहरी राज्यों व सीमापार से भी तस्करी होकर आ रहे हैं।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
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सुनील जाखड़ ने कहा कि कुछ तत्व पंजाब के सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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सुखबीर सिंह बादल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि “रंगला पंजाब की बात करने वाले लोग आज चुप क्यों हैं?”
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स्थानीय लोगों में लगातार बढ़ते गैंगस्टर घटनाक्रम को लेकर भय का माहौल है।
स्कूलों तक पहुंचा हथियार संस्कृति का खतरा
चिंताजनक बात यह है कि हिंसा का असर युवाओं पर भी दिख रहा है। हाल ही में एक स्कूली बच्चे के बैग से 32 बोर की पिस्तौल बरामद होने का मामला सामने आया। स्कूल और कॉलेजों में भी युवाओं द्वारा गुटबाजी और हथियार रखने के मामले बढ़ रहे हैं।
क्या है असल खतरा?
नवीन अरोड़ा की हत्या में शामिल युवक 21 से 25 वर्ष की आयु के थे। मुख्य आरोपी जतिन उर्फ काली की आर्थिक पृष्ठभूमि संदिग्ध है, जिससे आशंका बढ़ गई है कि वह किसी बड़े गिरोह या स्लीपर सेल के निर्देश पर काम कर रहा था। पुलिस द्वारा काली का शॉर्ट एनकाउंटर किए जाने के बाद कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, परंतु अभी दो शूटर और वित्तीय मदद देने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुँच नहीं पाई है।
पुलिस पर बढ़ते सवाल, जनता में असुरक्षा
इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पंजाब में पुलिस भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है। व्यापारी, डॉक्टर, कर्मचारी, अधिकारी—कोई भी अपने आप को महफूज नहीं मान रहा। लगातार बढ़ रही फिरौती, गोलीबारी और हिंसक घटनाओं ने प्रदेश को अस्थिर कर दिया है। कानून-व्यवस्था की यह हालत न सिर्फ आम नागरिकों को डराती है, बल्कि प्रदेश में उद्योगों के पलायन की संभावनाओं को भी बढ़ा रही है।
समाधान क्या?
पंजाब को जरूरत है—
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अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई,
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गुप्तचर तंत्र को मजबूत करने,
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अवैध हथियारों की कड़ी निगरानी,
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और एक सशक्त व सक्रिय नेतृत्व, जो आतंकवाद व गैंगस्टरों पर निर्णायक कार्रवाई कर सके।
फिलहाल हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि यदि तुरंत कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो पंजाब फिर से अशांति के दौर में प्रवेश कर सकता है—और यही सबसे बड़ी चिंता है।

