हाई बीपी को हल्के में लेना खतरनाक, समय पर जांच और नियमित इलाज जरूरी

  • लापरवाही से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा
  • बेहतर लाइफस्टाइल के लिए नियमित कराएं बीपी की जांच
 
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लखनऊ, 12 मई 2026: भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण हाई ब्लड प्रेशर यानी Hypertension की समस्या तेजी से बढ़ रही है। World Health Organization के अनुसार दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं और हर वर्ष लाखों लोगों की मौत इसका शिकार बनने से होती है। यही वजह है कि इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है। बड़ी समस्या यह है कि लगभग 46 प्रतिशत लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे हाई बीपी से पीड़ित हैं, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

आने वाले World Hypertension Day से पहले चिकित्सकों ने लोगों से नियमित ब्लड प्रेशर जांच कराने और इलाज को बीच में न छोड़ने की अपील की है। डायरेक्टर क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डॉ. आर.के. सरन ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में मरीजों को कोई विशेष परेशानी महसूस नहीं होती। कई लोग यह मान लेते हैं कि यदि उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो रही है तो उनका बीपी सामान्य होगा, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य ब्लड प्रेशर लगभग 120/80 माना जाता है, हालांकि दिनभर की गतिविधियों और तनाव के कारण इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है। केवल एक बार बीपी बढ़ा मिलने पर घबराने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि लगातार बीपी हाई मिले तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

डायरेक्टर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी डॉ. पी.के. गोयल ने कहा कि हाई बीपी का समय पर पता लगना बेहद जरूरी है। एक बार बीमारी की पुष्टि होने पर नियमित इलाज और दवाओं का लगातार सेवन आवश्यक होता है। कई मरीज बीपी सामान्य होने पर अपनी दवाएं खुद ही बंद कर देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ हाई बीपी का खतरा भी बढ़ता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। समय पर जांच और निरंतर इलाज से इससे होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डायरेक्टर इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी डॉ. एस.के. द्विवेदी ने कहा कि हाई बीपी से बचाव के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार बेहद जरूरी है। भोजन में नमक कम करें, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज करें, नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें और तनाव से दूर रहने का प्रयास करें। साथ ही 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बीपी जांच को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अनियंत्रित हाई बीपी रहने से Heart Attack, Heart Failure, Kidney Failure और Stroke जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में आंखों की रोशनी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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