जबलपुर क्रूज हादसा: बेटे को सीने से लगाए रही मां, ममता की दर्दनाक कहानी ने रुलाया देश
मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, लेकिन इस हादसे से जुड़ी एक मां की कहानी ने हर किसी को भावुक कर दिया। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि मां की ममता और त्याग की ऐसी मिसाल बन गई, जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो रही हैं।
दिल्ली निवासी प्रदीप मेसी अपनी पत्नी मरीना और चार वर्षीय बेटे त्रिशान के साथ घूमने के लिए बरगी डैम पहुंचे थे। परिवार नर्मदा की लहरों के बीच खूबसूरत पल बिताने निकला था, लेकिन अचानक बदले मौसम ने सबकुछ बदल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज हवाओं के साथ डैम में ऊंची लहरें उठने लगीं। देखते ही देखते क्रूज में पानी भरने लगा और कुछ ही देर में वह असंतुलित होकर पलट गया। हादसे के बाद वहां अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
इसी बीच मरीना ने अपने बेटे को बचाने की आखिरी कोशिश की। बताया जा रहा है कि उन्होंने त्रिशान को लाइफ जैकेट के भीतर सीने से कसकर लगा लिया, ताकि किसी भी हालत में बच्चा उनसे अलग न हो। लहरों और तेज पानी के बीच भी मां अपने बेटे को बचाने की कोशिश करती रही।
करीब 14 घंटे बाद जब रेस्क्यू टीम मलबे तक पहुंची, तो वहां का दृश्य बेहद मार्मिक था। मरीना का शव मिला और उनकी बाहों में उनका बेटा त्रिशान कसकर लिपटा हुआ था। बचावकर्मियों के अनुसार, दोनों को अलग करने में भी काफी समय लगा।
हादसे के बाद जब पोस्टमार्टम के पश्चात शव परिजनों को सौंपे गए, तो अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। पत्नी और बेटे को खो चुके प्रदीप मेसी का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार पर टूटा यह दुख हर किसी को अंदर तक झकझोर गया।
इस हादसे के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। क्या खराब मौसम के बावजूद क्रूज संचालन जारी रखना सही था? क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे? क्या समय रहते सतर्कता बरती जाती तो यह हादसा टल सकता था? प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी जांच की मांग तेज हो गई है।बरगी डैम की लहरें अब भले शांत हों, लेकिन इस हादसे ने एक परिवार की दुनिया हमेशा के लिए बदल दी। मां की ममता की यह कहानी लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
