जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बड़ा बयान: नवाबों ने नहीं, लक्ष्मण जी ने बसाया था लखनऊ; स्वयंभू मनु थे पहले संविधान निर्माता

Jagadguru Rambhadracharya's Major Statement: Lucknow Was Founded by Lord Lakshman, Not the Nawabs; Swayambhu Manu Was the First Constitution Maker.
 
Jagadguru Rambhadracharya's Major Statement: Lucknow Was Founded by Lord Lakshman, Not the Nawabs; Swayambhu Manu Was the First Constitution Maker.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चल रही नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा। विश्वविख्यात संत, पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से कथा पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान पूरा वातावरण 'जय श्रीराम' और 'जय जय हनुमान' के गगनभेदी उद्घोषों से गुंजायमान रहा।

कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने लखनऊ के इतिहास से लेकर भारतीय संविधान तक पर कई बेहद महत्वपूर्ण और बेबाक विचार साझा किए।

"लक्ष्मण जी ने बसाया था लखनऊ, नवाबों से कोई लेना-देना नहीं"

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के पक्ष में अदालत में अकाट्य तथ्य और सबूत पेश करने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लखनऊ के नामकरण को लेकर बड़ा ऐतिहासिक दावा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:इस ऐतिहासिक धरती को नवाबों ने नहीं, बल्कि प्रभु श्री राम के छोटे भाई कुमार लक्ष्मण ने बसाया था। यही स्थान कालांतर में बदलते-बदलते लखनऊ बन गया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से इस शहर का नवाबों से कोई लेना-देना नहीं है।"

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भारतीय संविधान पर उठाए सवाल, स्वयंभू मनु को बताया आदि निर्माता

अपने उद्बोधन के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने वर्तमान भारतीय संविधान की संरचना पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संविधान में देश के नाम को लेकर ‘इंडिया दैट इज भारत’ के बजाय ‘भारत दैट इज इंडिया’ होना चाहिए था।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि स्वयंभू मनु ही संसार के प्रथम संविधान निर्माता थे, लेकिन भारतीय संविधान में 'मनुस्मृति' की कोई चर्चा नहीं है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन संविधान निर्माताओं में कई लोग पर्याप्त दूरदर्शी नहीं थे और वर्तमान संविधान में ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी व फ्रांस जैसे देशों के संविधान की कतरनों (अंशों) को मिलाकर तैयार किया गया है।

"अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए होता है ईश्वर का अवतार"

कथा के तीसरे दिन भगवान के विविध अवतारों की महिमा का वर्णन करते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब-तब ईश्वर मानव रूप में अवतरित होते हैं।

  • अवतारवाद का उद्देश्य: प्रत्येक अवतार का एकमात्र उद्देश्य समाज को सही राह दिखाना, आसुरी व नकारात्मक शक्तियों का सर्वनाश करना और दैवीय व मानवीय मूल्यों को दोबारा स्थापित करना है। भारतीय संस्कृति में अवतारवाद का सीधा संदेश लोककल्याण, न्याय और धर्म की रक्षा करना है।

  • शिव विवाह प्रसंग: कथा के दौरान जब शिव विवाह का प्रसंग सुनाया गया, तो वहां मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पंडाल भक्ति रस में डूब गया।

व्यासपीठ का आशीर्वाद लेने पहुंचे कई गणमान्य लोग

इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति और सांस्कृतिक जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने कथा में शिरकत की और जगद्गुरु रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • दिनेश प्रताप सिंह (कृषि विपणन एवं उद्यान मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार)

  • डॉ. महेंद्र सिंह (पूर्व मंत्री एवं विधान परिषद सदस्य)

  • डॉ. नीरज बोरा (विधायक)

  • पद्मश्री मालिनी अवस्थी (प्रख्यात लोक गायिका)

  • ब्रजकिशोर गुप्ता (उपसभापति, यूपी कोऑपरेटिव यूनियन)

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