धनुष टूटते ही गूंजा जय श्रीराम, परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां
बलरामपुर। नगर में श्रीश्री 108 सत्य प्रचारिणी रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में बुधवार की रात फुलवारी लीला से लेकर भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह तक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। रावण-बाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद की जीवंत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे पंडाल में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
रामलीला का शुभारंभ रावण-बाणासुर संवाद से हुआ। रावण की गर्वोक्ति और बाणासुर के साथ उसके संवाद ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद जनकपुर के राजदरबार का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जहां राजा जनक द्वारा आयोजित धनुष यज्ञ में देश-विदेश से आए राजा शिवधनुष उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते।

इसके बाद भगवान श्रीराम ने सहजता से शिवधनुष उठाकर उसे तोड़ दिया। धनुष भंग होते ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। सीता स्वयंवर के प्रसंग में माता सीता द्वारा भगवान श्रीराम को वरमाला पहनाने की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद में हास्य और वीर रस का संगम
शिवधनुष टूटने के बाद मंचित परशुराम-लक्ष्मण संवाद रामलीला का प्रमुख आकर्षण रहा। परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण की विनोदपूर्ण वाणी ने मंच पर हास्य और वीर रस का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। दोनों पात्रों के संवाद और कलाकारों के अभिनय पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।इस प्रसंग में भगवान श्रीराम का यह भावपूर्ण कथन—“धनुष तोड़ने वाला कोई शिव का प्यारा ही होगा”—दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना। संवाद के दौरान मंच पर उत्साह और रोमांच का वातावरण बना रहा।
राम-विवाह की झांकी ने मोहा मन
रामलीला का समापन भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग के साथ हुआ। विवाह गीतों, मंगल ध्वनियों और भव्य बारात की झांकी ने पूरे पंडाल को मिथिला नगरी जैसा स्वरूप दे दिया। साज-सज्जा, संगीत और कलाकारों के अभिनय ने विवाह प्रसंग को जीवंत बना दिया। दर्शकों ने पूरी रात रामलीला का आनंद लिया और बार-बार ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाए।
भारतीय संस्कृति और आदर्शों से जोड़ने का प्रयास
रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि लखीमपुर खीरी के न्यू आदर्श रामलीला मंडल के कलाकार राधेश्याम रामायण पर आधारित प्रसंगों का मंचन कर रहे हैं। ऐसे आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों से जोड़ने का माध्यम भी हैं।कार्यक्रम के दौरान दर्शकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और मर्यादा के संदेश से जोड़ते हुए पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।



