Jaipur School Ground Report: भैंस के तबेले में चलने को मजबूर सरकारी स्कूल! CJP नेताओं पर हमले के बाद गरमाई सियासत; शिक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
Jaipur Bagru Government School Reality:राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रामपुरा-कंवरपुरा गांव से आई तस्वीरें बुनियादी शिक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यहाँ एक प्राथमिक विद्यालय कथित रूप से जर्जर टिन शेड और भैंसों के तबेले जैसी अमानवीय परिस्थितियों में संचालित हो रहा है, जहाँ मासूम बच्चे टूटी दीवारों और असुरक्षित छत के नीचे पढ़ाई करने को विवश हैं। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस बदहाली का मुआयना करने पहुँची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम पर हुए हमले के बाद यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।
छत से टपकता पानी, जमीन पर बैठे बच्चे
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जर्जर और असुरक्षित ढांचा: विद्यालय की मुख्य इमारत लंबे समय से खतरनाक घोषित है, जिसके चलते बच्चों को अस्थायी शेड और तबेलेनुमा परिसर में बैठाया जा रहा है।
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मौसमी मार और संसाधनों का अभाव: बरसात में छत से पानी टपकने और अत्यधिक गर्मी-सर्दी के बीच बुनियादी ब्लैकबोर्ड, डेस्क और स्वच्छ पेयजल जैसी प्राथमिक सुविधाओं का भारी अभाव नजर आता है।
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अदालती निर्देशों के बाद भी देरी: स्थानीय स्तर पर मरम्मत व निर्माण कार्य के दावों के बावजूद सालों से स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका है।
निरीक्षण के दौरान बवाल CJP नेताओं के आरोप
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका जब टीम के साथ स्कूल की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण करने पहुंचे, तो वहां तीखा विवाद और हिंसा की घटना सामने आई: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित था ताकि शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई जनता के सामने न आ सके। 48 घंटे का अल्टीमेटम पार्टी नेतृत्व ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि स्कूल के नए भवन का निर्माण कार्य तत्काल शुरू नहीं हुआ और उपद्रवियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो जयपुर में व्यापक स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
ग्रामीणों व स्थानीय प्रशासन का पक्ष
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बजट स्वीकृति का दावा: स्थानीय प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए सरकारी स्तर पर लगभग ₹12.50 लाख की राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है।
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राजनीतिकरण का विरोध: कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने बाहरी कार्यकर्ताओं द्वारा अचानक किए गए दौरे को अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
व्यवस्था के सामने बड़े नीतिगत सवाल
यह मामला केवल एक गांव या विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के पब्लिक एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है क्या 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) के तहत बच्चों को मिलने वाली शिक्षा केवल औपचारिक आंकड़ों तक सीमित है? बजट और योजनाओं की कागजी स्वीकृतियों के बावजूद निर्माण कार्य वर्षों तक जमीन पर क्यों नहीं उतर पाते? राजनीतिक खींचतान के बीच सबसे बड़ा नुकसान उन मासूम बच्चों का हो रहा है, जिनका भविष्य इन बदहाल इमारतों में दांव पर लगा है।
