जापान सिटी में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग का बनेगा बड़ा केंद्र
जापानी तकनीक और यूपी के हुनर के मेल से मजबूत होगी वैश्विक सप्लाई चेन : एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी
पहली तिमाही में एमएसएमई इकाइयों को 1.40 लाख करोड़ रुपये का ऋण : प्रमुख सचिव
लखनऊ, 21 अगस्त 2026। राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित मरकरी हॉल में शुक्रवार को ‘जापान-यूपी एमएसएमई पार्टनरशिप फोरम : को-क्रिएटिंग द नेक्स्ट ग्रोथ कॉरिडोर’ का आयोजन किया गया। फोरम में उत्तर प्रदेश और जापान के बीच एमएसएमई, निवेश, तकनीकी हस्तांतरण, निर्यात, स्टार्टअप, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, रोबोटिक्स और रोजगार के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील, सचिव प्रांजल यादव समेत जापानी प्रतिनिधिमंडल, उद्यमी, शिक्षाविद और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश का व्यापक एमएसएमई नेटवर्क और जापान की अत्याधुनिक तकनीक मिलकर प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार और निर्यात को नई गति दे सकते हैं।
500 एकड़ में विकसित हो रही जापान सिटी
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 90 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो देश की कुल एमएसएमई इकाइयों का करीब 14 प्रतिशत हैं। प्रदेश सरकार एमएसएमई उत्पादन और रोजगार में सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध नगर में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के समीप लगभग 500 एकड़ में ‘जापान सिटी’ विकसित की जा रही है। यह प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक इकोसिस्टम ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि जापानी उद्योगों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने वाली Kaizen, 5S और Green Manufacturing जैसी कार्यप्रणालियों को प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों में प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत और वेस्टेज घटाने तथा यूपी के उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि ODOP, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के जरिए स्थानीय उत्पादों, युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को बाजार एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास जारी है।
पहली तिमाही में 1.40 लाख करोड़ रुपये का ऋण
प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में ही प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा लगभग तीन लाख करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। प्रदेश का कुल निर्यात दो लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा अभियान के तहत करीब दो लाख युवाओं को अब तक आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा चुका है। अगले दस वर्षों में 10 लाख युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ODOP और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पांच लाख से अधिक पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
जापानी कंपनियों का यूपी पर बढ़ा भरोसा
सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल बड़ी आबादी वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि मजबूत कानून-व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापक एमएसएमई आधार वाले औद्योगिक प्रदेश के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि कुबोटा, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और मिंडा कॉरपोरेशन जैसी जापानी कंपनियों की मौजूदगी प्रदेश में जापानी उद्योगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद की स्थानीय एमएसएमई इकाइयां पिस्टन, रिंग्स और ऑटो पार्ट्स का उत्पादन कर होंडा और यामाहा जैसी जापानी कंपनियों को निर्यात कर रही हैं।
प्रांजल यादव ने कहा कि जापान-यूपी एमएसएमई पार्टनरशिप फोरम दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं के बीच महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है। जापानी उत्पादन प्रणालियों और तकनीकों को अपनाकर प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों की गुणवत्ता, उत्पादकता और निर्यात क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

स्थानीय हुनर को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
राजगढ़िया एक्सपोर्ट्स, बरेली के सीईओ सुधीर राजगढ़िया ने बताया कि बरेली की जरी-जरदोजी कला को डिजिटल तकनीक के जरिए वैश्विक बाजार से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय डिजाइनरों के साथ सहयोग ने स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने में मदद की है।
वहीं एकेटीयू इनोवेशन हब के सीईओ डॉ. महिप सिंह ने बताया कि प्रदेश में 20 हजार से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और 80 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और रोबोटिक्स के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने जापानी विश्वविद्यालयों एवं उद्योगों के साथ स्टूडेंट एक्सचेंज और संयुक्त रिसर्च की संभावनाओं पर जोर दिया।

जापानी स्टार्टअप्स के लिए ‘सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म’ का प्रस्ताव
आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर की एमडी यामिनी भूषण पांडे ने जापानी एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए उत्तर प्रदेश में ‘सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म’ विकसित करने का सुझाव दिया। इसके जरिए जापानी उद्यमियों को भारतीय बाजार समझने, स्थानीय साझेदार खोजने और कारोबार विस्तार में सहायता मिल सकेगी।
नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने कहा कि नोएडा के गारमेंटिंग उद्योग से करीब 10 लाख लोग जुड़े हैं और यहां से 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात होता है। उन्होंने जापान के रेडीमेड कपड़ा बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं बताईं।

फोरम में इस बात पर सहमति जताई गई कि जेवर एयरपोर्ट के समीप विकसित हो रही 500 एकड़ की जापान सिटी उत्तर प्रदेश-जापान औद्योगिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है। जापानी तकनीक, गुणवत्ता मानकों और उत्पादन प्रणालियों को यूपी के स्थानीय हुनर एवं व्यापक एमएसएमई नेटवर्क से जोड़कर प्रदेश को वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

