समुद्र की लहरों पर शहर बसाने की तैयारी में जापान, तैरते प्लेटफॉर्म बदलेंगे भविष्य की तस्वीर

Japan is preparing to establish a city on the waves of the sea, floating platforms will change the picture of the future.
 
समुद्र की लहरों पर शहर बसाने की तैयारी में जापान, तैरते प्लेटफॉर्म बदलेंगे भविष्य की तस्वीर

नई दिल्ली। बढ़ती आबादी, सीमित भूमि और तेजी से महंगी होती जमीन के बीच भविष्य के शहरों को लेकर दुनिया भर में नए प्रयोग किए जा रहे हैं। जापान भी इसी दिशा में एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। यहां समुद्र की सतह पर विशाल तैरते प्लेटफॉर्म तैयार करने की अवधारणा पर काम किया जा रहा है, जिन पर भविष्य में शहर जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

इन फ्लोटिंग प्लेटफॉर्मों को इतना विशाल बनाने की योजना है कि उन पर हवाई अड्डे, बंदरगाह, औद्योगिक इकाइयां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा सकें। आने वाले समय में इन्हें पर्यटन केंद्रों के रूप में भी विकसित करने की संभावना जताई जा रही है। यहां तैरते रेस्तरां, मनोरंजन क्षेत्र, गोल्फ कोर्स और जलक्रीड़ा से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

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जमीन की कमी ने बढ़ाई समुद्र की ओर उम्मीद

जापान कई द्वीपों में फैला देश है और यहां बड़े शहरों में भूमि की उपलब्धता हमेशा एक चुनौती रही है। समुद्र से जमीन हासिल करने के लिए रिक्लेमेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल पहले भी किया गया है, लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इस विकल्प की अपनी सीमाएं हैं।

शहरी क्षेत्रों में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ने और ऊंची इमारतों के निर्माण की भी व्यावहारिक सीमाएं होने के कारण समुद्र की सतह पर नए स्थान विकसित करने का विचार महत्वपूर्ण हो गया है। इसी सोच के तहत जापानी इंजीनियर समुद्र में ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार जोड़ा और विस्तारित किया जा सके।

भूकंप के खतरे के बीच नई तकनीक

जापान भूकंप प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में समुद्र पर बनने वाले किसी भी बड़े ढांचे के लिए उसकी सुरक्षा और स्थिरता सबसे अहम मुद्दा होगी। प्रस्तावित फ्लोटिंग प्लेटफॉर्मों की डिजाइन में समुद्री परिस्थितियों और भूकंपीय गतिविधियों को ध्यान में रखने की बात कही जा रही है।

इन प्लेटफॉर्मों को समुद्र में मजबूत एंकरिंग सिस्टम के जरिए स्थिर रखने की तकनीक पर भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही छोटे-छोटे मॉड्यूल तैयार कर उन्हें समुद्र में जोड़कर बड़े प्लेटफॉर्म का रूप देने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

100 साल तक टिकाऊ बनाने की चुनौती

समुद्र में लंबे समय तक किसी विशाल ढांचे को सुरक्षित बनाए रखना आसान नहीं है। लगातार खारे पानी के संपर्क में रहने के कारण धातु में जंग लगने और संरचना को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए इंजीनियर ऐसी निर्माण सामग्री और तकनीक विकसित करने पर जोर दे रहे हैं, जो दशकों तक समुद्री वातावरण का सामना कर सके।

प्रस्तावित प्लेटफॉर्मों की लंबी उपयोग अवधि को ध्यान में रखते हुए उनकी मजबूती, रखरखाव, समुद्री पर्यावरण पर प्रभाव और आपातकालीन सुरक्षा जैसे पहलुओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।

छोटे प्लेटफॉर्म से बड़े समुद्री शहर तक

इस तरह की परियोजना को एक साथ विशाल स्तर पर शुरू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की अवधारणा पर जोर दिया जा रहा है। पहले छोटे यूनिट तैयार किए जा सकते हैं, जिन्हें समुद्र में सुरक्षित तरीके से स्थापित करने के बाद आपस में जोड़ा जाएगा। आबादी और जरूरत बढ़ने पर नए मॉड्यूल जोड़कर इसका विस्तार किया जा सकेगा।

भविष्य में यदि यह तकनीक सफल रहती है तो समुद्र पर केवल औद्योगिक या पर्यटन केंद्र ही नहीं, बल्कि आवासीय और व्यावसायिक परिसर भी विकसित किए जा सकते हैं। ऐसे में फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म एक तरह के आत्मनिर्भर मिनी सिटी का रूप ले सकते हैं।

पर्यावरण और सुरक्षा पर भी नजर

समुद्र में बड़े पैमाने पर निर्माण का असर समुद्री पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है। इसलिए परियोजना से जुड़े तकनीकी पहलुओं के साथ पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री जीव-जंतुओं, जल प्रवाह और आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किए बिना बड़े स्तर पर निर्माण करना चुनौतीपूर्ण होगा।

यदि जापान इस तरह की परियोजना को व्यावहारिक और सुरक्षित तरीके से विकसित करने में सफल रहता है, तो यह भविष्य के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग साबित हो सकता है। सीमित भूमि वाले देशों के लिए समुद्र की सतह का उपयोग आने वाले वर्षों में शहरी विस्तार का एक नया विकल्प बन सकता है।

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