प्रशासनिक व दक्षता परीक्षाओं में आरक्षण का औचित्य?

Justification of reservation in administrative and efficiency examinations?i
 
प्रशासनिक व दक्षता परीक्षाओं में आरक्षण का औचित्य?

(डॉ. सुधाकर आशावादी – विभूति फीचर्स)

भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में चयन देश के प्रतिभाशाली युवाओं का सपना होता है। प्रतिवर्ष सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही विभिन्न संचार माध्यमों में सफल युवाओं की उपलब्धियों और संघर्ष की कहानियाँ प्रमुखता से सामने आती हैं। जातीय और क्षेत्रीय अभ्यर्थियों की रैंक चर्चा का विषय बनती है तथा सीमित संसाधनों के बावजूद सामान्य तथा उपेक्षित परिवारों के प्रतिभाशाली युवा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनते हैं। समाचार पत्र और पत्रिकाएँ सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार प्रकाशित कर उनके कठिन परिश्रम और संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करते हैं।

कटु सत्य यह है कि विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण के बावजूद सामान्य वर्ग के कई प्रतिभाशाली युवा शीर्ष रैंक प्राप्त कर सफलता के शिखर को छूते हैं। वहीं जो अभ्यर्थी पहली बार में सफल नहीं हो पाते, वे पुनः अधिक गंभीरता और समर्पण के साथ तैयारी में जुट जाते हैं। सिविल सेवा जैसी परीक्षाओं में सफलता के लिए किया जाने वाला परिश्रम गरीबी-अमीरी, जाति या धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर किया जाता है।

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इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि ऐसी प्रतियोगी परीक्षाएँ मूलतः योग्यता और प्रतिभा के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन करती रही हैं। हालांकि पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि असफल अभ्यर्थियों या उनके समर्थकों द्वारा कभी परीक्षा प्रक्रिया पर भेदभाव का आरोप लगाया जाता है, तो कभी साक्षात्कार को असफलता का कारण बताया जाता है।

जब से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए दस प्रतिशत आरक्षण लागू हुआ है, तब से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के कुछ वर्गों में यह धारणा भी देखने को मिलती है कि सामान्य वर्ग के EWS उम्मीदवार उनके अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में कई बार परीक्षा प्रक्रिया पर ही प्रश्न उठाए जाते हैं।

लेखक का मत है कि देश की शीर्ष प्रशासनिक और चिकित्सा सेवाओं में चयन पूर्णतः योग्यता और क्षमता के आधार पर होना चाहिए। इसके लिए परीक्षा आवेदन पत्रों में अभ्यर्थियों की जाति का कॉलम भी नहीं होना चाहिए और साक्षात्कार के दौरान जाति पूछना या बताना दंडनीय बनाया जाना चाहिए। इससे न केवल चयन प्रक्रिया पर उठने वाले संदेह कम होंगे, बल्कि प्रशासनिक एवं चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता भी और सुदृढ़ होगी।

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