स्पिक मैके और स्टडी हॉल स्कूल में कथकली कलाकार कलामंडलम एम. अमलजीत का स्वागत

Spic Macay and Study Hall School welcome Kathakali artist Kalamandalam M. Amaljeet
 
Spic Macay and Study Hall School welcome Kathakali artist Kalamandalam M. Amaljeet
लखनऊ, 10 सितम्बर 2025।
भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति को छात्रों तक पहुँचाने के प्रयास के तहत स्टडी हॉल स्कूल ने स्पिक मैके के सहयोग से प्रसिद्ध कथकली कलाकार कलामंडलम एम. अमलजीत का विशेष आयोजन किया। यह कार्यक्रम दो स्थानों – स्टडी हॉल विद्यास्थली (मलिहाबाद) और स्टडी हॉल, गोमती नगर (लखनऊ) – पर आयोजित हुआ।

इस अवसर पर अमलजीत ने केरल की शास्त्रीय नृत्य-नाट्य परंपरा कथकली का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने नवरस (नौ भावनाओं) के माध्यम से दिखाया कि कैसे भाव-भंगिमाएँ और हाथ की मुद्राएँ भारतीय कथाओं और संस्कृति को जीवंत कर देती हैं। प्रस्तुति में उनका साथ देने के लिए सुरेश कुमार आर., ओमणाकुट्टन, विनोद कुमार और सुनील एस. मौजूद रहे, जिन्होंने संगीत और वादन से कार्यक्रम को और प्रभावशाली बनाया।

यह अनुभव विद्यार्थियों के लिए यादगार रहा। कई बच्चों ने पहली बार कथकली को इतने करीब से देखा और कलाकारों से संवाद के दौरान जाना कि इस कला में निपुण होने के लिए गहन साधना, अनुशासन और वर्षों की मेहनत आवश्यक है।
कार्यक्रम के बाद अपने विचार साझा करते हुए कलामंडलम एम. अमलजीत ने कहा:
“कथकली केवल नृत्य नहीं है, यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को साझा करने का माध्यम है। भाव और गतियों के जरिए हम हर व्यक्ति के दिल तक पहुँच सकते हैं। मुझे खुशी है कि स्पिक मैके और स्टडी हॉल स्कूल ने मुझे बच्चों तक यह अनुभव पहुँचाने का अवसर दिया।”
इस मौके पर डॉ. उर्वशी साहनी, संस्थापक एवं सीईओ, स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन ने कहा शास्त्रीय कलाओं को स्कूलों में लाना केवल सांस्कृतिक गतिविधि भर नहीं, बल्कि शिक्षा का अहम हिस्सा है। इससे बच्चों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से सीधा जुड़ने का अवसर मिलता है। हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को भी आत्मसात करें और आत्मविश्वासी वैश्विक नागरिक बनें।”
यह आयोजन स्पिक मैके के उस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 1977 में डॉ. किरण सेठ ने की थी। आज यह पहल हज़ारों स्कूलों और कॉलेजों तक पहुँच चुकी है और लगातार युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रही है।

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