मौसम बदलाव में प्राकृतिक चिकित्सा से सर्दी-जुकाम को रखें नियंत्रित
सामान्य जुकाम क्या है?
सामान्य जुकाम ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रामक रोग है, जिसमें मुख्य रूप से नाक प्रभावित होती है। इसके तहत खांसी, नाक से स्राव, गले में खराश, सिरदर्द, छींक, आंखों-नाक से पानी आना और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लगभग 200 से अधिक वायरस इसकी वजह बन सकते हैं, जिनमें राइनोवायरस प्रमुख है। लक्षण प्रायः 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई बार तीन सप्ताह तक बने रह सकते हैं।
इंफ्लुएंजा क्या है?
इंफ्लुएंजा में रोगी को तेज कंपकपी के साथ बुखार, बदन दर्द, गले और नाक में सूजन, तेज सिरदर्द और असहजता महसूस होती है। तापमान कई बार 102 से 104 डिग्री तक पहुँच जाता है।
प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा उपचार एवं घरेलू उपाय
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नीम के गुनगुने जल से एक दिन छोड़कर एनीमा लें।
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पेट, माथे, हाथ-पैर पर मिट्टी की पट्टी लगाएँ, फिर पेट व कमर पर गर्म-ठंडा सेंक करें।
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दो ग्लास पानी पीकर गर्म कटि स्नान व जलनेति करें।
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अधिक बुखार में पेट और माथे पर ठंडी पट्टी तथा शरीर का स्पंज करें।
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ठंड अधिक लगे तो गर्म पाद स्नान से पसीना लाएँ।
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तुलसी के 4-5 पत्ते एक लीटर पानी में उबालकर दिनभर पिएँ।
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पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहें।
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जंक फूड से बचें और सुपाच्य पौष्टिक भोजन लें।
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विश्राम के साथ मन प्रसन्न रखें।
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सुबह खाली पेट कुंजल क्रिया एवं हल्का नमक युक्त गुनगुने पानी से जल नेति करें।
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नियमित फुट बाथ लें।
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धूप एवं ताज़ी हवा में कुछ समय अवश्य बिताएँ।
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छाती व पीठ पर सूखे हाथों से घर्षण मालिश करें।
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सप्ताह में एक दिन गरम पानी/फल रस के साथ उपवास रखें।
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सूर्यनमस्कार, सर्वांगासन, पवनमुक्तासन आदि योगासन और कपालभाति, भस्त्रिका, उज्जायी जैसे प्राणायाम लाभकारी हैं।
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नाक में सुबह 5-5 बूंद बादाम तेल डालकर नस्यम करें।
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पानी की भाप या अमृतधारा की दो बूंद मिलाकर भाप लें।
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आटे में थोड़ी काली मिर्च मिलाकर बनी रोटी का सेवन करें।
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आवश्यकता से अधिक भोजन न करें।
समय रहते सावधानी और प्राकृतिक चिकित्सा अपनाकर सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
- डॉ मोहम्मद हसीन सिद्दीकी
(नेचुरोपैथी एवं फिजियोथेरेपिस्ट)
