खिचड़ी महापर्व : गोरखनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
बाबा का खप्पर भरने श्रद्धा की अंजुरी में खिचड़ी लेकर पहुंचे लाखों श्रद्धालु
सीएम योगी ने सबसे पहले महायोगी गोरखनाथ को अर्पित की पवित्र खिचड़ी
पूरे आयोजन पर स्वयं नजर बनाए रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर, जनवरी 2026 । मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त, प्रातः चार बजे, शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार श्रद्धा की पवित्र खिचड़ी अर्पित कर लोकमंगल की कामना की। मुख्यमंत्री के बाद नाथ योगियों, साधु-संतों ने भी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात मंदिर के गर्भगृह के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
कपाट खुलते ही गोरखनाथ मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंदिर परिसर में पहुंचे। लोक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग से चली आ रही बाबा गोरखनाथ का खप्पर भरने की परंपरा का निर्वहन करते हुए श्रद्धालु श्रद्धा की अंजुरी में आस्था की खिचड़ी लेकर नतमस्तक होते नजर आए। नेपाल राजपरिवार की ओर से भेजी गई खिचड़ी भी पूरे विधि-विधान के साथ बाबा को अर्पित की गई।खिचड़ी चढ़ाने के उपरांत श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में लगे विशाल मेले का भ्रमण किया और मनोरंजन के साथ आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर उत्सव का आनंद लिया।
नाथपंथीय परंपरा के अनुसार हुआ विधिविधान से पूजन
मकर संक्रांति की भोर में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नाथपंथ की परंपरा के अनुसार गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में भूमि पर बैठकर, सीटी बजाकर गुरु गोरखनाथ को प्रणाम कर आदेश लिया। तत्पश्चात विधिविधान से पूजन कर गोरक्षपीठ की ओर से श्रीनाथ जी को खिचड़ी (चावल, दाल, तिल, सब्जी, हल्दी, नमक आदि) अर्पित की।
इसके बाद उन्होंने मुख्य मंदिर में विराजमान अन्य देव विग्रहों की पूजा-अर्चना की तथा योगिराज बाबा गंभीरनाथ, दादागुरु महंत दिग्विजयनाथ, गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ, नौमीनाथ सहित अन्य नाथ योगियों की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाकर खिचड़ी भोग अर्पित किया।मुख्यमंत्री द्वारा खिचड़ी अर्पित किए जाने के पश्चात उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली सहित अन्य राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर बाबा गोरखनाथ को श्रद्धा की खिचड़ी चढ़ाई।
दिनभर चलता रहा खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला
महायोगी गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करने का क्रम पूरे दिन अनवरत चलता रहा। भक्तों की कतार एक पल के लिए भी नहीं टूटी। दोपहर बाद तक मंदिर की ओर आने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई देता रहा।खिचड़ी चढ़ाने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी-देवताओं के विग्रहों का पूजन किया तथा ब्रह्मलीन महंत बाबा गंभीरनाथ, महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की समाधियों पर शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा मंदिर परिसर दिनभर “जय गुरु गोरखनाथ” के जयघोष से गूंजता रहा।श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर मंदिर प्रशासन एवं जिला प्रशासन द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सभी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए थे।
भोर तीन बजे से ही लग गई थी लंबी कतार
गोरखनाथ मंदिर का खिचड़ी मेला केवल आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी अद्भुत उदाहरण है। हर वर्ग, हर समुदाय के लोग नंगे पांव कतारबद्ध होकर बाबा को खिचड़ी अर्पित कर रहे थे। कोई मुट्ठी भर चावल लेकर आया था तो कोई झोली भर—पर बाबा के प्रति भाव सभी का एक समान था। न जाति का भेद, न धर्म की दीवार।
बुधवार को भी लाखों श्रद्धालुओं ने खिचड़ी चढ़ाई थी, जबकि गुरुवार को यह संख्या और बढ़ गई। भोर में तीन बजे ही मंदिर परिसर से बाहर सड़क तक लंबी कतारें लग गई थीं। विभिन्न द्वारों और बैरिकेडिंग के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा था।
खिचड़ी सहभोज का हुआ आयोजन
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी प्रसाद वितरण हेतु सहभोज का आयोजन किया गया। अमीर-गरीब, जाति-वर्ग के भेद से ऊपर उठकर सभी ने एक साथ खिचड़ी प्रसाद ग्रहण किया।इसके साथ ही आमंत्रित अतिथियों के लिए भी सहभोज आयोजित किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों, उद्यमियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी सहभागिता रही।
नेपाल के राजगुरु माने जाते हैं महायोगी गोरखनाथ
नाथपंथ के अध्येता डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ का नेपाल से गहरा आध्यात्मिक संबंध है। मकर संक्रांति पर गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा खिचड़ी अर्पित किए जाने के बाद नेपाल राजपरिवार की ओर से भेजी गई खिचड़ी चढ़ाई जाती है। गुरु गोरखनाथ को नेपाल में राजगुरु के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है।
त्रेतायुग से जुड़ी है खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा
गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा को त्रेतायुगीन माना जाता है। मान्यता है कि आदियोगी गुरु गोरखनाथ एक बार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित मां ज्वाला देवी के दरबार में पहुंचे थे। भिक्षा में प्राप्त अन्न को भोजन रूप में ग्रहण करने की परंपरा के चलते, गोरखपुर क्षेत्र में राप्ती और रोहिन के तट पर उन्होंने धूनी रमाई। लोगों द्वारा उनके खप्पर में अन्नदान किए जाने की यह परंपरा मकर संक्रांति पर खिचड़ी पर्व के रूप में स्थापित हो गई, जो आज भी निरंतर जारी है।
