Lalyta Gautam Murder Case: ललिता गौतम हत्याकांड पर भड़का आक्रोश, हरिद्वार में कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; मेरठ पुलिस पर बर्बरता का आरोप

Lalyta Gautam Murder Case: Outrage erupts over the Lalyta Gautam murder case; Congress submits a memorandum addressed to the President in Haridwar; Meerut police accused of brutality.
 
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Haridwar Congress Protest for Lalita Gautam: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम की कथित तौर पर हत्या, बलात्कार और अपहरण के मामले को लेकर पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस अमानवीय घटना और उसके बाद न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में बुधवार को कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग ने हरिद्वार में जबरदस्त प्रदर्शन किया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित समाज के प्रतिनिधियों ने हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट (जिलाधिकारी के माध्यम से) के कार्यालय पर पहुंचकर देश के महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मेरठ पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

🚨 मेरठ पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बर लाठीचार्ज का आरोप

हरिद्वार में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष तीर्थपाल रवि और उत्तराखंड प्रदेश उपाध्यक्ष नेत्रपाल सिंह अठवाल ने मेरठ पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। नेताओं ने बताया कि मेरठ में ललिता गौतम को न्याय दिलाने के लिए दलित समाज के लोग जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। चूंकि वहां धरने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक स्थान नहीं था, इसलिए लोग सड़क पर ही बैठ गए। आरोप है कि मेरठ के एसपी (क्राइम) अविनाश पांडे के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने अचानक धरना स्थल का गेट बंद कर दिया और शांतिपूर्वक न्याय मांग रही महिलाओं, बेटियों और निर्दोष लोगों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया।पुलिस द्वारा महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और लाठीचार्ज में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद अपनी आवाज उठा रहे निर्दोष दलितों पर ही पुलिस ने झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। यह कृत्य अनुसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 (SC-ST Act) का सीधा उल्लंघन है और संविधान द्वारा दिए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का हनन है।" - नेत्रपाल सिंह अठवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष

📋 राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस की 4 प्रमुख मांगें

हरिद्वार जिला कांग्रेस कमेटी (अनुसूचित जाति विभाग) ने राष्ट्रपति से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे हैं:

  1. एसएसपी का निलंबन व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस: मेरठ में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारियों और पुलिस बल के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए और उनके विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।

  2. CBI जांच की मांग: ललिता गौतम हत्याकांड की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या उच्च स्तरीय निष्पक्ष न्यायिक आयोग से कराई जाए।

  3. झूठे मुकदमे वापस हों: पुलिसिया दमन का शिकार हुए और जेल भेजे गए सभी निर्दोष दलित समाज के लोगों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए।

  4. मुआवजा और सुरक्षा: घटना के पीड़ितों और पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए प्रदर्शनकारियों का इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाए, उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए और पीड़ित परिवार को तत्काल न्यायिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

👥 प्रदर्शन में ये प्रमुख नेता रहे मौजूद

हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से:

  • आदेश प्रधान (जिला महासचिव, अनुसूचित जाति विभाग)

  • प्रिया व्रत (पूर्व ब्लॉक प्रमुख)

  • सी.पी. सिंह, सतपाल शास्त्री, प्रवीण कुमार जायसवाल, अजय दास महाराज, मोनू कुमार, महेश प्रताप राणा, आशीष पवार, अरुणोदय चौहान और सुभाष कुमार सहित भारी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह न्याय आंदोलन अब उत्तराखंड तक फैल चुका है, जिससे आने वाले दिनों में दोनों राज्यों की कानून व्यवस्था और राजनीति पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

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