यूपी में जमीन का नाम बदलना और लैंड यूज चेंज होगा आसान: योगी सरकार की 'डिजिटल' पहल, फरवरी 2026 तक पूरी होगी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से भू-प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। अब लेखपालों की लंबी आख्या का इंतजार नहीं करना होगा और कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।
लखनऊ | 05 जनवरी, 2026 उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों और उद्यमियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। भू-प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित (Citizen-centric) बनाने के लिए भू-स्वामित्व नामांतरण (धारा-34) और लैंड यूज चेंज (धारा-80) की जटिल प्रक्रियाओं का डिजिटल सरलीकरण किया जा रहा है।इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद जमीन से जुड़े कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म: NIC कर रहा है तैयार
राजस्व परिषद और स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग मिलकर इस व्यवस्था को लागू कर रहे हैं। राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र (NIC) एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है जो एक एकीकृत प्लेटफॉर्म (Unified Platform) के रूप में काम करेगा। इससे डेटा फ्लो तेज होगा और अभिलेखों की जांच ऑनलाइन ही की जा सकेगी।
नामांतरण (धारा-34) में क्या बदलेगा?
संपत्ति हस्तांतरण के बाद खतौनी में नाम चढ़वाने की प्रक्रिया, जिसे नामांतरण (Mutation) कहा जाता है, अब पूरी तरह डिजिटल होगी।
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एक बार में अपलोड: खसरा-खतौनी और मालिकाना हक के दस्तावेज ऑनलाइन पंजीकरण के समय ही संकलित कर लिए जाएंगे।
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कम होगा समय: अब लेखपाल की आख्या (रिपोर्ट) के लिए हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल डेटा फ्लो के माध्यम से ऑटोमेटेड जांच की व्यवस्था होगी।
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पारदर्शिता: फॉर्म भरने और दस्तावेज जमा करने के कई स्तरों को समाप्त कर दिया गया है।
लैंड यूज चेंज (धारा-80) का सरलीकरण
कृषि भूमि को गैर-कृषि (औद्योगिक या आवासीय) उपयोग में बदलने की प्रक्रिया अब उबाऊ नहीं रहेगी।
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नो भागदौड़: आवेदन, अनुमोदन और सर्टिफिकेट के लिए अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
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सरल प्रारूप: विभाग ने आवेदन फॉर्म और सर्टिफिकेट के नए सरल प्रारूपों का परीक्षण पूरा कर लिया है।
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औद्योगिक निवेश: प्रक्रिया आसान होने से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तेज होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
व्हाट्सएप और एसएमएस पर मिलेंगे नोटिस
पारंपरिक डाक व्यवस्था में नोटिस मिलने में देरी होती थी, जिसका फायदा अक्सर भू-माफिया उठाते थे। अब नई व्यवस्था के तहत:
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तत्काल सूचना: प्रक्रिया से संबंधित सभी नोटिस सीधे आवेदक के WhatsApp, SMS या ऑनलाइन पोर्टल पर भेजे जाएंगे।
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ऑनलाइन सर्टिफिकेट: नामांतरण और लैंड यूज चेंज का सर्टिफिकेट कुछ ही दिनों में पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा प्रभाव संपत्ति संबंधी विवादों और भ्रष्टाचार पर पड़ेगा।
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अपराध में कमी: डिजिटल रिकॉर्ड होने से जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
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बिचौलियों की छुट्टी: सीधी ऑनलाइन प्रक्रिया से बिचौलियों का हस्तक्षेप समाप्त होगा।
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समय की बचत: महीनों का काम अब दिनों में पूरा हो सकेगा।
इस सुधार से न केवल आम आदमी को लाभ होगा, बल्कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
