लाइव टाइम्स के ‘ऑपरेशन गोल्ड’ ने सोने की शुद्धता में चिंताजनक अनियमितताओं का किया खुलासा
भारत में सोना केवल एक वित्तीय निवेश नहीं, बल्कि घरेलू सुरक्षा और दीर्घकालिक बचत का प्रमुख साधन माना जाता है। सोने की खरीद-फरोख्त में उपभोक्ताओं का विश्वास मुख्य रूप से हॉलमार्क शुद्धता प्रमाणन पर आधारित होता है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किया गया है कि आभूषण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।
भारत के पहले ग्लोबल मल्टीकास्ट न्यूज हब Live Times ने अपने अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन ‘ऑपरेशन गोल्ड – सबसे बड़ी लूट’ के माध्यम से सोने की शुद्धता को लेकर गंभीर चिंताएं उजागर की हैं। इस विशेष जांच में रिपोर्टरों ने चुनिंदा ज्वेलरी काउंटरों पर ग्राहकों के रूप में कई बार खरीदारी की। बिक्री के दौरान किए गए शुद्धता दावे, बिलिंग विवरण और संवाद को छिपे कैमरों के जरिए रिकॉर्ड किया गया।
स्वतंत्र जांच में सामने आई विसंगतियां
खरीद के बाद आभूषणों की स्वतंत्र शुद्धता जांच कराई गई। परिणामों में संकेत मिला कि कुछ मामलों में उपभोक्ताओं से उच्च कैरेट (जैसे 18 कैरेट) के सोने के लिए बिलिंग की गई, जबकि परीक्षण में वास्तविक शुद्धता कम (जैसे 14 कैरेट) पाई गई। इसके बावजूद आभूषणों पर उच्च शुद्धता दर्शाने वाली हॉलमार्क मुहर मौजूद थी। यह स्थिति शुद्धता प्रमाणन और अनुपालन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
‘पीपल फर्स्ट’ पत्रकारिता का दावा
दिलीप सिंह, संस्थापक, सीईओ और एडिटर-इन-चीफ, लाइव टाइम्स ने कहा कि “‘ऑपरेशन गोल्ड – सबसे बड़ी लूट’ केवल एक खुलासा नहीं, बल्कि जनहित में की गई पहल है। हमारा नेटवर्क ‘पीपल फर्स्ट’ की भावना पर आधारित है, जहां हम नागरिकों के विश्वास, उनकी बचत और गरिमा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। जब विश्वास आधारित बाजार में शुद्धता ही संदिग्ध हो जाए, तो चुप्पी सहमति के समान हो जाती है। हमारा उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है, ताकि उपभोक्ता निवेश से पहले पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर सकें।”
दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में अंडरकवर रिकॉर्डिंग
जांच के दौरान दिल्ली-एनसीआर के कई बाजारों—चांदनी चौक, लाजपत नगर, करोल बाग, रोहिणी और गाजियाबाद—में अंडरकवर वीडियो रिकॉर्ड किए गए। इन वीडियो में एक ज्वेलरी प्रतिष्ठान के प्रतिनिधि को कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाया गया कि शुद्धता विनिर्देश मांग के अनुसार बदले जा सकते हैं। एक बातचीत में यह आरोप भी सामने आया कि 14 कैरेट सोना उपलब्ध कराकर उसे 18 कैरेट हॉलमार्क के रूप में बिल में दर्शाया जा सकता है।
उपभोक्ता चेतावनी और सख्त अनुपालन की मांग
उच्च खरीदारी अवधि के दौरान प्रसारित इस स्टिंग को उपभोक्ता चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जांच ने बिक्री के समय अधिक सतर्क सत्यापन और सोना रिटेल इकोसिस्टम में मौजूदा अनुपालन तंत्र के सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह प्रकरण सोने के बाजार में पारदर्शिता, गुणवत्ता नियंत्रण और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।
