लंदन डायरी : ऑक्सफोर्ड क्यों है ज्ञान, भाषा और प्रतिष्ठा का पर्याय?
(विवेक रंजन श्रीवास्तव–विभूति फीचर्स)
हाथ में अंग्रेजी की किताब हो और कोई कठिन शब्द सामने आ जाए, तो कभी हम तुरंत ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी खोल लेते थे। आज वही शब्दकोश ऑनलाइन उपलब्ध है। स्कूल की ड्रेस में ऑक्सफोर्ड शर्ट, पैरों में ऑक्सफोर्ड शूज और कपड़ों में ऑक्सफोर्ड फैब्रिक जैसे शब्द भी आम हैं। ऐसे में सवाल स्वाभाविक है कि आखिर यह ‘ऑक्सफोर्ड’ है क्या?
क्या यह सिर्फ इंग्लैंड का एक शहर है, एक विश्वविद्यालय है, अंग्रेजी भाषा की पहचान है, बौद्धिकता का केंद्र है या पश्चिमी शिक्षा की उस परंपरा का प्रतीक है जिसने सदियों से ज्ञान को सामाजिक प्रतिष्ठा में बदलने की कला विकसित की?
दरअसल, ऑक्सफोर्ड इन सभी सवालों का सम्मिलित उत्तर है। इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड शहर में पहुंचने पर यह महसूस होता है कि यहां विश्वविद्यालय किसी एक विशाल परिसर तक सीमित नहीं है। शहर और विश्वविद्यालय एक-दूसरे में इस तरह घुले-मिले हैं कि पूरा शहर ही मानो विश्वविद्यालय का विस्तार प्रतीत होता है। सदियों पुरानी पत्थर की इमारतें, संकरी गलियां, साइकिलों की कतारें, ऐतिहासिक पुस्तकालय, कॉलेजों के प्रांगण, चर्चों के शिखर, नदी किनारे की हरियाली और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थी मिलकर ऑक्सफोर्ड की पहचान बनाते हैं।

900 वर्षों से अधिक पुरानी शैक्षणिक परंपरा
ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी भाषी दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। यहां शिक्षण गतिविधियों के प्रमाण 1096 से मिलते हैं। 1167 के बाद इसका विकास तेज हुआ, जब इंग्लैंड के राजा हेनरी द्वितीय ने अंग्रेज विद्यार्थियों के पेरिस विश्वविद्यालय जाने पर रोक लगा दी। इसके बाद ऑक्सफोर्ड इंग्लैंड के बौद्धिक जीवन का महत्वपूर्ण केंद्र बनता गया।
ऑक्सफोर्ड की स्थापना किसी एक व्यक्ति ने नहीं की। यह विद्यार्थियों और अध्यापकों के समुदाय के रूप में धीरे-धीरे विकसित हुआ। 13वीं शताब्दी में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक संरचना मजबूत हुई और इसके बाद कॉलेजों की परंपरा विकसित होती गई।
यहां एक अंतर समझना जरूरी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और उसके कॉलेज एक ही संस्था नहीं हैं। विश्वविद्यालय व्यापक अकादमिक व्यवस्था है, जबकि कॉलेज विद्यार्थियों के आवास, छोटे समूहों में अध्ययन, भोजन, सामाजिक जीवन और व्यक्तिगत शैक्षणिक मार्गदर्शन के केंद्र हैं। यही कॉलेज प्रणाली ऑक्सफोर्ड की सबसे विशिष्ट पहचान में से एक है।
पढ़ाई से ज्यादा विचार करने की संस्कृति
ऑक्सफोर्ड की शिक्षा व्यवस्था केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित नहीं रही। छोटे समूहों में ट्यूटोरियल और विचार-विमर्श की परंपरा विद्यार्थियों को प्रश्न करने, तर्क प्रस्तुत करने और अपने विचारों का बचाव करने के लिए तैयार करती है।
यहां विद्यार्थी से केवल यह अपेक्षा नहीं की जाती कि उसने किताब पढ़ ली है। उससे यह भी पूछा जाता है कि उसने विषय को किस हद तक समझा और उसके बारे में स्वतंत्र रूप से क्या सोचता है।
शायद यही कारण है कि ऑक्सफोर्ड की शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों में एक अलग तरह का बौद्धिक आत्मविश्वास विकसित करती है।
राजनीति से साहित्य और विज्ञान तक प्रभाव
ऑक्सफोर्ड की प्रतिष्ठा को विश्वभर में स्थापित करने में यहां से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्तित्वों की भी बड़ी भूमिका रही है। ब्रिटेन के अनेक प्रधानमंत्री यहां पढ़ चुके हैं। ऑक्सफोर्ड की आधिकारिक जानकारी में 28 ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं का उल्लेख मिलता है।
टोनी ब्लेयर, मार्गरेट थैचर, क्लेमेंट एटली और डेविड कैमरन जैसे नाम इसकी राजनीतिक विरासत से जुड़े हैं।
भारत और दक्षिण एशिया में भी ऑक्सफोर्ड का प्रभाव दिखाई देता है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सोमरविल कॉलेज में अध्ययन किया था, जबकि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो लेडी मार्गरेट हॉल से जुड़ी रहीं।
साहित्य के क्षेत्र में ऑस्कर वाइल्ड, जे. आर. आर. टॉल्किन, सी. एस. लुईस, टी. एस. एलियट, डब्ल्यू. एच. ऑडेन और आइरिस मर्डोक जैसे नाम ऑक्सफोर्ड की बौद्धिक परंपरा को समृद्ध करते हैं।
विज्ञान में भी इसका योगदान उल्लेखनीय रहा है। स्टीफन हॉकिंग ने यहां अध्ययन किया और रोजर पेनरोज जैसे वैज्ञानिक ऑक्सफोर्ड से जुड़े रहे। विश्वविद्यालय की शोध परंपरा आज भी दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में इसकी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।
ऑक्सफोर्ड और आधुनिक दुनिया
ऑक्सफोर्ड की विरासत केवल अतीत की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वर्ल्ड वाइड वेब के आविष्कारक टिम बर्नर्स-ली भी ऑक्सफोर्ड से जुड़े रहे। दर्शन, साहित्य, अर्थशास्त्र, राजनीति और विज्ञान के अनेक प्रभावशाली व्यक्तित्व इसकी परंपरा का हिस्सा रहे हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार उसके पूर्व विद्यार्थियों और शिक्षकों में नोबेल पुरस्कार विजेताओं और ओलंपिक पदक विजेताओं की बड़ी संख्या शामिल है।
ऑक्सफोर्ड की विशेषता यह है कि उसने परंपरा और आधुनिकता को एक-दूसरे के विरोध में नहीं रखा। मध्ययुगीन धर्मशास्त्र और क्लासिकल अध्ययन से शुरू हुई अकादमिक यात्रा आज चिकित्सा, कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन, जैव-विज्ञान और आधुनिक तकनीक तक पहुंच चुकी है।
महिलाओं की शिक्षा में भी बदलाव
ऑक्सफोर्ड की यात्रा सामाजिक बदलाव की कहानी भी है। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में महिलाओं के लिए अकादमिक हॉल स्थापित किए गए और 1920 में महिलाओं को विश्वविद्यालय की पूर्ण सदस्यता का अधिकार मिला। आगे चलकर विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा के द्वार खुले।
बोडलियन लाइब्रेरी और ज्ञान का विशाल संसार
ऑक्सफोर्ड की पहचान उसके पुस्तकालयों के बिना अधूरी है। बोडलियन लाइब्रेरी केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि सदियों की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने वाला महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां दुर्लभ पुस्तकें, ऐतिहासिक दस्तावेज और पांडुलिपियां संरक्षित हैं। और जब ऑक्सफोर्ड की बात होती है तो ‘ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी’ को भला कैसे भुलाया जा सकता है?
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने पहुंचाया घर-घर तक नाम
Oxford English Dictionary की परियोजना 19वीं शताब्दी में विकसित हुई। अंग्रेजी भाषा के शब्दों और उनके ऐतिहासिक प्रयोगों को दर्ज करने की यह विशाल परियोजना बाद में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से जुड़ी। 1884 में इसका पहला मुद्रित भाग प्रकाशित हुआ और 2000 में इसका ऑनलाइन संस्करण सामने आया।
आज Oxford English Dictionary सिर्फ शब्दों के अर्थ बताने वाला शब्दकोश नहीं है। यह अंग्रेजी भाषा के विकास का ऐतिहासिक दस्तावेज है। इसमें लाखों शब्दार्थ और उद्धरणों के माध्यम से सदियों में अंग्रेजी भाषा में आए बदलावों को दर्ज किया गया है।
यही वह माध्यम है जिसने ऑक्सफोर्ड नाम को दुनिया के करोड़ों विद्यार्थियों तक पहुंचाया। इनमें ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने शायद कभी ऑक्सफोर्ड शहर देखा तक नहीं, लेकिन अपनी पढ़ाई के दौरान ‘Oxford Dictionary’ जरूर खोली है।
अब ऑक्सफोर्ड है वैश्विक विश्वविद्यालय
आज ऑक्सफोर्ड में 26 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं और दुनिया के 170 से अधिक देशों व क्षेत्रों से विद्यार्थी यहां पहुंचते हैं। अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की बड़ी हिस्सेदारी इसे केवल ब्रिटेन का विश्वविद्यालय नहीं रहने देती, बल्कि एक वैश्विक बौद्धिक नेटवर्क बना देती है।
विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा का अंदाजा वैश्विक रैंकिंग में उसकी लगातार मजबूत स्थिति से भी लगाया जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जलवायु विज्ञान तक विभिन्न क्षेत्रों में ऑक्सफोर्ड का शोध आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाल रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन के विकास में ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों की भूमिका ने भी इसकी आधुनिक वैज्ञानिक क्षमता को दुनिया के सामने रखा।
ज्ञान के साथ अर्थव्यवस्था में भी योगदान
ऑक्सफोर्ड अब केवल शिक्षा और शोध का केंद्र नहीं है। विश्वविद्यालय की गतिविधियों का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव है। शोध, शिक्षा, नवाचार और पर्यटन के माध्यम से विश्वविद्यालय और उसके कॉलेज स्थानीय तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
पुराने कॉलेजों के प्रांगण से गुजरते हुए ऐसा लगता है जैसे समय यहां रुका नहीं, बल्कि उसने अपनी कई परतें यहां जमा कर दी हैं। एक परत में मध्ययुगीन धर्मशास्त्र है, दूसरी में पुनर्जागरण, तीसरी में विज्ञान की क्रांति, चौथी में लोकतांत्रिक राजनीति, पांचवीं में महिला शिक्षा, छठी में आधुनिक वैश्विक शोध और अब एक नई परत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डिजिटल ज्ञान की है।
आज ऑक्सफोर्ड में कोई विद्यार्थी सदियों पुरानी पांडुलिपि पर शोध कर सकता है तो उसी शहर में दूसरा विद्यार्थी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई संभावनाओं पर काम कर सकता है। कोई साहित्य में टॉल्किन पढ़ सकता है, कोई चिकित्सा विज्ञान में कैंसर पर शोध कर सकता है और कोई राजनीति में लोकतंत्र की बदलती चुनौतियों पर विचार कर सकता है।
यही ऑक्सफोर्ड की असली शक्ति है—अतीत की विरासत को वर्तमान के ज्ञान से जोड़ते हुए भविष्य की दिशा तलाशना।और शायद इसी कारण ‘ऑक्सफोर्ड’ केवल एक शहर या विश्वविद्यालय का नाम नहीं रहा। यह ज्ञान, भाषा, शोध, परंपरा और वैश्विक प्रतिष्ठा का एक ऐसा प्रतीक बन चुका है, जिसकी पहचान सदियों की बौद्धिक यात्रा से निर्मित हुई है।
