शोषण मुक्त समाज के प्रेरक थे भगवान परशुराम: गोण्डा में 'शस्त्र और शास्त्र' के समन्वय पर ज़ोर
सनातन धर्म के प्रथम क्रांतिकारी: सुरेन्द्र मिश्र 'सूर्य'
परशुराम जयंती समारोह समिति के संयोजक एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुरेन्द्र मिश्र 'सूर्य' ने संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भगवान परशुराम सनातन धर्म के पहले ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अधर्म और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
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शोषण मुक्त समाज: उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम ने दुष्टों का संहार कर एक ऐसे समाज की नींव रखने का संदेश दिया जो शोषण से मुक्त हो। उनका जीवन वीरता और विद्वत्ता का अद्भुत संगम है।
समाज को सशक्त बनाने के लिए 'शस्त्र और शास्त्र' अनिवार्य
वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार आर. जे. शुक्ल 'यदुराय' की अध्यक्षता में आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने समाज की एकता पर विशेष बल दिया। संगोष्ठी के मुख्य बिंदु रहे:
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ज्ञान और शक्ति का समन्वय: वक्ताओं ने कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में समाज को सशक्त बनाने के लिए 'शस्त्र' (शक्ति) और 'शास्त्र' (ज्ञान) दोनों में पारंगत होना अनिवार्य है।
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सामाजिक एकता: नील ठाकुर, गौरीशंकर चतुर्वेदी और अजय विक्रम सिंह ने समाज के भीतर बिखराव को खत्म कर एकजुट होने का आह्वान किया।
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सांस्कृतिक चेतना: कविवर विनय शुक्ल 'अक्षत' और सिद्धार्थ शुक्ल ने अपनी वाणी से युवाओं को सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस वैचारिक सत्र में अभिषेक दूबे, अश्वनी तिवारी, आचार्य गंगानाथ शुक्ल और अजय कुमार शुक्ल 'अज्जू' ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान प्रवीण मिश्रा, रामानन्द, सुरेन्द्र तिवारी, विनोद तिवारी, कृष्ण कुमार तिवारी, रुद्र करुणा सिंध मिश्र, मनोज मिश्रा और रुद्र प्रताप सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


