लखनऊ: महर्षि यूनिवर्सिटी में 'सोशल साइंसेज' पर सेमिनार संपन्न, विशेषज्ञों ने बहुविषयक दृष्टिकोण पर दिया जोर
ज्ञान परंपरा और विज्ञान का मेल
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत संबोधन देते हुए डीन डॉ. रूपम सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, वहीं समन्वयक श्री मुकेश कुमार पांडे ने सेमिनार की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डीन अकादमिक्स डॉ. नीरज जैन ने भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करते हुए इसे आज की जरूरत बताया।
प्रमुख वक्ताओं का संबोधन: 'जटिल समस्याओं का सरल समाधान'
दो सत्रों में चले इस सेमिनार में लखनऊ के दिग्गज शिक्षाविदों ने अपने विचार साझा किए:
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प्रथम सत्र: श्री जे.एन.एम.पी.जी. कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि सामाजिक समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए 'अंतर्विषयक' (Interdisciplinary) पद्धति अनिवार्य है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के दृष्टिकोण से विषयों को जोड़ने पर बल दिया।
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द्वितीय सत्र: लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजय गुप्ता ने शोध लेखों में बहुविषयक जानकारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह पद्धति न केवल मानविकी (Humanities) बल्कि विज्ञान के विषयों के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
मेधावी छात्र सम्मानित और पुस्तक का अनावरण
सेमिनार में हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान और राजनीति विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों के छात्र-छात्राओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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सम्मान: सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए मान्या सिंह, शाहिस्ता परवीन और साक्षी मिश्रा को सम्मानित किया गया।
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विमोचन: कार्यक्रम के दौरान डॉ. राम प्रकाश दीक्षित द्वारा संपादित पुस्तक “उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग और संभावनाएँ” के आवरण पृष्ठ का अनावरण किया गया। इसके साथ ही शोध पत्रों की एक स्मारिका (Souvenir) का भी विमोचन हुआ।
सफल आयोजन और प्रबंधन
डॉ. राम प्रकाश दीक्षित ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कृति मिश्रा और श्रेया गुप्ता ने किया, जबकि संयोजन डॉ. विजय श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
यह सफल आयोजन यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव, कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अंत में राष्ट्रगान और सामूहिक छायाचित्र के साथ इस शैक्षणिक महाकुंभ का समापन हुआ।

