लखनऊ बना देश के सबसे वित्तीय रूप से आशावादी शहरों में शामिल, बचत और निवेश में भी बढ़ोतरी

Lucknow ranks among the country's most financially optimistic cities; rise in savings and investments too.
 
होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी रिपोर्ट का चौथा संस्करण ‘कर राहत से प्रत्यक्ष बदलाव तक—कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च’ थीम के साथ जारी किया है। रिपोर्ट में सामने आया है कि कर्ज तक बेहतर पहुंच और जीएसटी से जुड़े सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत ने लोगों के घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके चलते रोजमर्रा के खर्च का दबाव कुछ कम हुआ है और लोगों का वित्तीय आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।  होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा कि 2023 में शुरू की गई ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी’ का उद्देश्य देश के लोगों की आर्थिक सोच और वित्तीय व्यवहार को समझना था। उन्होंने कहा कि अध्ययन से लगातार यह सामने आया है कि भारतीय उपभोक्ता वित्तीय मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेते हैं। इस वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलाव से मिली राहत और व्यवस्थित वित्तीय साधनों के इस्तेमाल ने लोगों के लिए संपत्ति निर्माण और कारोबार विस्तार के अवसर बढ़ाए हैं।  आय और बचत में हुआ सुधार  GIW 2026 के अनुसार, लखनऊ में 56 प्रतिशत उत्तरदाता अपने मासिक खर्च पूरे करने के बाद बचत कर पा रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 5 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। अध्ययन के मुताबिक, लखनऊ में औसत मासिक घरेलू आय करीब 29,000 रुपये, जबकि औसत मासिक खर्च लगभग 19,000 रुपये है।  पिछले साल के मुकाबले शहर में आय के स्तर में 6 अंकों, बचत में 17 अंकों और निवेश में 21 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि लखनऊ के परिवार वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए भी बेहतर योजना बना रहे हैं।  करीब 58 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अब अप्रत्याशित खर्चों का सामना करना पहले की तुलना में आसान हो गया है।  घरेलू बजट में ग्रॉसरी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी  अध्ययन के अनुसार लखनऊ के परिवारों के नियमित खर्च में खाद्यान्न और ग्रॉसरी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 30 प्रतिशत है। इसके बाद परिवहन और किराये पर 16-16 प्रतिशत, बच्चों की शिक्षा पर 13 प्रतिशत, मेडिकल खर्च पर 11 प्रतिशत, बिजली-पानी जैसे उपयोगिता बिलों पर 7 प्रतिशत, रसोई गैस पर 4 प्रतिशत और मोबाइल बिल पर 2 प्रतिशत खर्च होता है।  वहीं, गैर-जरूरी या अपनी पसंद से किए जाने वाले खर्चों में फैशन और कपड़े 39 प्रतिशत के साथ सबसे आगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरणों पर 12 और 11 प्रतिशत, यात्रा पर 11 प्रतिशत तथा होम डेकोर पर करीब 5 प्रतिशत खर्च किया जाता है।  कारोबार और घर खरीदना प्रमुख वित्तीय लक्ष्य  भविष्य की वित्तीय योजनाओं को लेकर भी लखनऊ के लोगों की प्राथमिकताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। 27 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कारोबार शुरू करने को अपनी प्रमुख वित्तीय आकांक्षा बताया। इसके बाद 25 प्रतिशत लोगों के लिए घर खरीदना सबसे बड़ा लक्ष्य है।  बच्चों की शिक्षा के लिए बचत और पुराने कर्ज चुकाना 15-15 प्रतिशत लोगों की प्राथमिकता है, जबकि 6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कार खरीदने को प्रमुख वित्तीय लक्ष्य बताया।  इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 32 प्रतिशत लोगों ने आकर्षक ब्याज दर और लचीली पुनर्भुगतान अवधि वाले ऋण या क्रेडिट को सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन माना। इसके बाद जीवन बीमा 12 प्रतिशत, स्वास्थ्य बीमा 9 प्रतिशत, फिक्स्ड डिपॉजिट 8 प्रतिशत, म्यूचुअल फंड/एसआईपी 7 प्रतिशत और सोने में निवेश 5 प्रतिशत लोगों की प्राथमिकता रहा।  जीएसटी बदलावों से परिवारों को राहत का अनुभव  लखनऊ के लोगों में जीएसटी से जुड़े बदलावों को लेकर भी उल्लेखनीय जागरूकता सामने आई है। अध्ययन में 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि जीएसटी से संबंधित बदलावों ने परिवार के कल्याण पर होने वाले खर्च को बेहतर किया है।  करीब 30 प्रतिशत लोगों ने कारों की कीमतों में कमी महसूस की, जबकि 31 प्रतिशत ने दोपहिया वाहनों की कीमतों में गिरावट की बात कही। जीएसटी 2.0 के बाद उपभोक्ताओं के खर्च के पैटर्न में भी बदलाव देखा गया है। करीब 16 प्रतिशत लोग भोजन की गुणवत्ता और 6 प्रतिशत स्वास्थ्य देखभाल पर पहले की तुलना में अधिक खर्च कर रहे हैं।  यह बदलाव संकेत देता है कि आर्थिक राहत का एक हिस्सा अब परिवारों के जीवन स्तर और आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने में लगाया जा रहा है।  17 शहरों में किया गया अध्ययन  ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 4.0’ अध्ययन 18 से 55 वर्ष की आयु के ऐसे कर्जदारों के बीच किया गया, जो देश के 17 प्रमुख शहरों में रहते हैं। सर्वे में विभिन्न आय वर्गों और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया।  रिपोर्ट के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि बदलते आर्थिक माहौल में भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं केवल रोजमर्रा के खर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बचत, निवेश, संपत्ति निर्माण और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा की ओर भी तेजी से बढ़ रही हैं। लखनऊ इस बदलाव की दिशा में मजबूत वित्तीय आशावाद दिखाने वाले शहरों में प्रमुखता से उभर रहा है।

लखनऊ। होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026’ (GIW 4.0) का चौथा संस्करण जारी किया है। ‘कर राहत से लेकर प्रत्यक्ष बदलावों तक, कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च’ थीम पर आधारित इस अध्ययन में देश के उपभोक्ताओं की वित्तीय सोच, घरेलू खर्च, बचत, निवेश और भविष्य की आर्थिक आकांक्षाओं में आए बदलावों को रेखांकित किया गया है।

अध्ययन के मुताबिक, लखनऊ देश के सबसे वित्तीय रूप से आशावादी शहरों में उभरकर सामने आया है। शहर में घरेलू बचत और निवेश की क्षमता में सुधार के साथ लोगों का भविष्य के वित्तीय कल्याण को लेकर भरोसा भी बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में 56 प्रतिशत उत्तरदाता मासिक घरेलू खर्च पूरा करने के बाद बचत कर पा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत अंक अधिक है।

होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी रिपोर्ट का चौथा संस्करण ‘कर राहत से प्रत्यक्ष बदलाव तक—कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च’ थीम के साथ जारी किया है। रिपोर्ट में सामने आया है कि कर्ज तक बेहतर पहुंच और जीएसटी से जुड़े सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत ने लोगों के घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके चलते रोजमर्रा के खर्च का दबाव कुछ कम हुआ है और लोगों का वित्तीय आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।

होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा कि 2023 में शुरू की गई ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी’ का उद्देश्य देश के लोगों की आर्थिक सोच और वित्तीय व्यवहार को समझना था। उन्होंने कहा कि अध्ययन से लगातार यह सामने आया है कि भारतीय उपभोक्ता वित्तीय मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेते हैं। इस वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलाव से मिली राहत और व्यवस्थित वित्तीय साधनों के इस्तेमाल ने लोगों के लिए संपत्ति निर्माण और कारोबार विस्तार के अवसर बढ़ाए हैं।

आय और बचत में हुआ सुधार

GIW 2026 के अनुसार, लखनऊ में 56 प्रतिशत उत्तरदाता अपने मासिक खर्च पूरे करने के बाद बचत कर पा रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 5 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। अध्ययन के मुताबिक, लखनऊ में औसत मासिक घरेलू आय करीब 29,000 रुपये, जबकि औसत मासिक खर्च लगभग 19,000 रुपये है।

पिछले साल के मुकाबले शहर में आय के स्तर में 6 अंकों, बचत में 17 अंकों और निवेश में 21 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि लखनऊ के परिवार वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए भी बेहतर योजना बना रहे हैं। करीब 58 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अब अप्रत्याशित खर्चों का सामना करना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

घरेलू बजट में ग्रॉसरी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी

अध्ययन के अनुसार लखनऊ के परिवारों के नियमित खर्च में खाद्यान्न और ग्रॉसरी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 30 प्रतिशत है। इसके बाद परिवहन और किराये पर 16-16 प्रतिशत, बच्चों की शिक्षा पर 13 प्रतिशत, मेडिकल खर्च पर 11 प्रतिशत, बिजली-पानी जैसे उपयोगिता बिलों पर 7 प्रतिशत, रसोई गैस पर 4 प्रतिशत और मोबाइल बिल पर 2 प्रतिशत खर्च होता है।

वहीं, गैर-जरूरी या अपनी पसंद से किए जाने वाले खर्चों में फैशन और कपड़े 39 प्रतिशत के साथ सबसे आगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरणों पर 12 और 11 प्रतिशत, यात्रा पर 11 प्रतिशत तथा होम डेकोर पर करीब 5 प्रतिशत खर्च किया जाता है।

कारोबार और घर खरीदना प्रमुख वित्तीय लक्ष्य

भविष्य की वित्तीय योजनाओं को लेकर भी लखनऊ के लोगों की प्राथमिकताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। 27 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कारोबार शुरू करने को अपनी प्रमुख वित्तीय आकांक्षा बताया। इसके बाद 25 प्रतिशत लोगों के लिए घर खरीदना सबसे बड़ा लक्ष्य है।

बच्चों की शिक्षा के लिए बचत और पुराने कर्ज चुकाना 15-15 प्रतिशत लोगों की प्राथमिकता है, जबकि 6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कार खरीदने को प्रमुख वित्तीय लक्ष्य बताया। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 32 प्रतिशत लोगों ने आकर्षक ब्याज दर और लचीली पुनर्भुगतान अवधि वाले ऋण या क्रेडिट को सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन माना। इसके बाद जीवन बीमा 12 प्रतिशत, स्वास्थ्य बीमा 9 प्रतिशत, फिक्स्ड डिपॉजिट 8 प्रतिशत, म्यूचुअल फंड/एसआईपी 7 प्रतिशत और सोने में निवेश 5 प्रतिशत लोगों की प्राथमिकता रहा।

जीएसटी बदलावों से परिवारों को राहत का अनुभव

लखनऊ के लोगों में जीएसटी से जुड़े बदलावों को लेकर भी उल्लेखनीय जागरूकता सामने आई है। अध्ययन में 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि जीएसटी से संबंधित बदलावों ने परिवार के कल्याण पर होने वाले खर्च को बेहतर किया है।

करीब 30 प्रतिशत लोगों ने कारों की कीमतों में कमी महसूस की, जबकि 31 प्रतिशत ने दोपहिया वाहनों की कीमतों में गिरावट की बात कही। जीएसटी 2.0 के बाद उपभोक्ताओं के खर्च के पैटर्न में भी बदलाव देखा गया है। करीब 16 प्रतिशत लोग भोजन की गुणवत्ता और 6 प्रतिशत स्वास्थ्य देखभाल पर पहले की तुलना में अधिक खर्च कर रहे हैं। यह बदलाव संकेत देता है कि आर्थिक राहत का एक हिस्सा अब परिवारों के जीवन स्तर और आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने में लगाया जा रहा है।

17 शहरों में किया गया अध्ययन

‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 4.0’ अध्ययन 18 से 55 वर्ष की आयु के ऐसे कर्जदारों के बीच किया गया, जो देश के 17 प्रमुख शहरों में रहते हैं। सर्वे में विभिन्न आय वर्गों और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि बदलते आर्थिक माहौल में भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं केवल रोजमर्रा के खर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बचत, निवेश, संपत्ति निर्माण और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा की ओर भी तेजी से बढ़ रही हैं। लखनऊ इस बदलाव की दिशा में मजबूत वित्तीय आशावाद दिखाने वाले शहरों में प्रमुखता से उभर रहा है।

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