लखनऊ बना देश के सबसे वित्तीय रूप से आशावादी शहरों में शामिल: होम क्रेडिट इंडिया की स्टडी
लखनऊ। देश की प्रमुख कंज्यूमर फाइनेंस कंपनियों में शामिल होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026’ का चौथा संस्करण जारी किया है। इस वर्ष की स्टडी की थीम ‘कर राहत से लेकर प्रत्यक्ष बदलावों तक, कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च’ रखी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज तक बढ़ती पहुंच और जीएसटी सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत ने भारतीय उपभोक्ताओं की वित्तीय सोच में बदलाव किया है। रोजमर्रा के घरेलू खर्च का दबाव कुछ कम हुआ है, जबकि लोगों के आर्थिक आत्मविश्वास में मजबूती आई है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अपना घर खरीदना अभी भी लोगों के प्रमुख दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों में शामिल है।
लखनऊ में बढ़ा वित्तीय भरोसा
‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026’ के अनुसार, लखनऊ देश के सबसे अधिक वित्तीय रूप से आशावादी शहरों में उभरकर सामने आया है। रिपोर्ट में शहर के लोगों के बीच बढ़ते वित्तीय आत्मविश्वास, मजबूत घरेलू बचत और भविष्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक सोच को रेखांकित किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, लखनऊ के 56 प्रतिशत उत्तरदाता अपने मासिक खर्च पूरे करने के बाद बचत करने में सक्षम हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें 5 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि घरेलू खर्च में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद शहर में बचत क्षमता में सुधार हुआ है।
लखनऊ में उत्तरदाताओं की औसत मासिक घरेलू आय करीब 29,000 रुपये, जबकि औसत मासिक खर्च 19,000 रुपये बताया गया है। पिछले साल की तुलना में शहर में आय में 6 अंकों, बचत में 17 अंकों और निवेश में 21 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह वित्तीय क्षमता में सुधार और भविष्य के लिए बेहतर आर्थिक योजना की ओर संकेत करता है। वहीं, 58 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अब वे अप्रत्याशित खर्चों को पहले की तुलना में आसानी से संभाल पा रहे हैं।
ग्रॉसरी पर सबसे ज्यादा खर्च
अध्ययन के मुताबिक लखनऊ के परिवारों के घरेलू बजट में सबसे बड़ा हिस्सा खाद्यान्न और ग्रॉसरी का है, जो कुल वॉलेट शेयर का 30 प्रतिशत है। इसके बाद परिवहन और किराया 16-16 प्रतिशत, बच्चों की शिक्षा 13 प्रतिशत, चिकित्सा खर्च 11 प्रतिशत, बिजली-पानी जैसे बिल 7 प्रतिशत, रसोई गैस 4 प्रतिशत और मोबाइल बिल 2 प्रतिशत है।
वहीं, अपनी इच्छा से किए जाने वाले खर्च में फैशन और कपड़े 39 प्रतिशत के साथ सबसे आगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घरेलू उपकरणों पर 12 और 11 प्रतिशत, यात्रा पर 11 प्रतिशत तथा होम डेकोर पर 5 प्रतिशत खर्च किए जाने की बात अध्ययन में सामने आई है।
कारोबार और घर खरीदना प्रमुख वित्तीय लक्ष्य
भविष्य की आर्थिक आकांक्षाओं को लेकर भी लखनऊ के उपभोक्ताओं में स्पष्ट प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं। अध्ययन के अनुसार 27 प्रतिशत उत्तरदाताओं का प्रमुख लक्ष्य अपना व्यवसाय शुरू करना है, जबकि 25 प्रतिशत घर खरीदना चाहते हैं।
इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत करना और पुराने ऋण चुकाना 15-15 प्रतिशत उत्तरदाताओं की प्राथमिकता है, जबकि 6 प्रतिशत लोगों ने कार खरीदने को अपना प्रमुख वित्तीय लक्ष्य बताया।
इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आकर्षक ब्याज दर और लचीली पुनर्भुगतान अवधि के साथ ऋण या क्रेडिट को 32 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन माना। इसके बाद जीवन बीमा 12 प्रतिशत, स्वास्थ्य बीमा 9 प्रतिशत, फिक्स्ड डिपॉजिट 8 प्रतिशत, म्यूचुअल फंड/एसआईपी 7 प्रतिशत और सोने में निवेश 5 प्रतिशत का स्थान रहा।
जीएसटी बदलावों को लेकर जागरूकता
रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में जीएसटी से जुड़े बदलावों को लेकर भी लोगों में अपेक्षाकृत अच्छी जागरूकता देखने को मिली। 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि जीएसटी से जुड़े बदलावों ने परिवार के कल्याण से संबंधित खर्चों को बेहतर बनाने में मदद की है।
करीब 30 प्रतिशत लोगों ने कारों और 31 प्रतिशत ने दोपहिया वाहनों की कीमतों में कमी महसूस की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीएसटी 2.0 के बाद उपभोक्ता भोजन की गुणवत्ता पर 16 प्रतिशत और स्वास्थ्य देखभाल पर 6 प्रतिशत अधिक खर्च कर रहे हैं। इसे घरेलू जीवन स्तर में क्रमिक सुधार की दिशा में बदलाव के तौर पर देखा गया है।
वित्तीय व्यवहार में आया बदलाव
होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा कि जब वर्ष 2023 में ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी’ की शुरुआत की गई थी, तब उद्देश्य भारत के लोगों की आर्थिक सोच को समझना था। उनके अनुसार, इस वर्ष के निष्कर्ष वित्तीय व्यवहार में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करते हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलाव से मिलने वाली राहत और व्यवस्थित वित्तीय साधनों के इस्तेमाल ने लोगों के लिए संपत्ति निर्माण तथा कारोबार के विस्तार की संभावनाओं को आसान बनाया है।
17 शहरों के उपभोक्ताओं पर अध्ययन
‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट 4.0’ अध्ययन 18 से 55 वर्ष की आयु के कर्जदारों के बीच किया गया। इसमें देश के 17 प्रमुख शहरों के विभिन्न आय वर्गों और पेशों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन का उद्देश्य बदलते आर्थिक माहौल में भारतीय उपभोक्ताओं के खर्च, बचत, निवेश, ऋण और भविष्य की वित्तीय प्राथमिकताओं को समझना था।
