लखनऊ मंडल: माध्यमिक विद्यालयों की व्यावसायिक शिक्षा में बढ़ानी होगी छात्रों की संख्या, कड़े निर्देश जारी
Lucknow Vocational Education News: उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉ. महेंद्र देव ने लखनऊ मंडल के सभी शासकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा योजनाओं के तहत हर ट्रेड में छात्र संख्या बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में मंडल स्तर पर संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कौशल विकास और स्वावलंबन पर मुख्य फोकस
मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने इस नीति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छात्र-छात्राओं के भीतर कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा देने और उन्हें पढ़ाई के साथ ही रोजगार के काबिल बनाने के लिए मंडल के विभिन्न सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा योजनाएं (Vocational Education Schemes) चलाई जा रही हैं।
छात्र संख्या को लेकर क्या है शासकीय व्यवस्था?
डॉ. दिनेश कुमार के मुताबिक, इन रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा एक मानक तय किया गया है:
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सामान्य नियम: व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित प्रत्येक ट्रेड में कम से कम 25 विद्यार्थियों का होना अनिवार्य है।
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विशेष परिस्थिति: कुछ विशेष और असाधारण परिस्थितियों में न्यूनतम 10 छात्रों की संख्या के साथ भी इन ट्रेड्स को व्यवस्थित और संचालित किया जा सकता है।
लखनऊ मंडल के सभी 6 जिलों के DIOS को आदेश जारी
शिक्षा निदेशक के इस आदेश को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक (JJD) लखनऊ मंडल, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने इस संबंध में मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालयों को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।
इसके तहत निम्नलिखित जिलों के माध्यमिक विद्यालयों में इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा:
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लखनऊ
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हरदोई
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उन्नाव
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लखीमपुर खीरी
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सीतापुर
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रायबरेली
"छात्रों को स्वावलंबी बनाएगी यह योजना" — डॉ. दिनेश कुमार
इस महत्वपूर्ण निर्णय पर अपना आधिकारिक वक्तव्य (कोट) देते हुए मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने कहा उत्तर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा संचालित यह व्यावसायिक शिक्षा योजना लखनऊ मंडल के छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। यह कोर्स युवाओं को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाएंगे, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी (Self-reliant) बनाने में भी पूरी तरह सहायक सिद्ध होंगे।"
इस नए कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले शैक्षणिक सत्रों में माध्यमिक स्तर पर ही छात्र पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ हुनर सीख सकेंगे, जिससे सीधे तौर पर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी।

