लखनऊ: विभागों में तालमेल की कमी से जानकीविहार में 'सीवर संकट सड़क निर्माण में दबे 20 मैनहोल, घरों में बैकफ्लो से जनता बेहाल

Lucknow: Lack of coordination between departments leads to 'sewer crisis' in Janakivihar; 20 manholes buried during road construction, residents distressed by sewage backflow into homes.
 
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लखनऊ ब्यूरो (20 जून 2026):  राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम प्रथम वार्ड से एक बड़ा प्रशासनिक और नागरिक संकट सामने आया है। यहां की जानकीविहार कॉलोनी में हाल ही में कराए गए सड़क निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरतते हुए करीब 18 से 20 सीवर मैनहोल चैंबरों को सड़क के नीचे दबा दिया गया। मैनहोल चैंबरों के मलबे और डामर के नीचे पूरी तरह छिप जाने के कारण सीवर नेटवर्क की नियमित सफाई और रखरखाव का काम ठप हो गया है, जिससे इस पॉश इलाके के अधिकांश घरों में सीवर का गंदा पानी बैकफ्लो मार रहा है।

नालियां सीवर से जुड़ी होने के कारण विकराल हुई समस्या

स्थानीय भौगोलिक बनावट के अनुसार, इस क्षेत्र की जल निकासी नालियां सीधे मुख्य सीवर मैनहोल से जुड़ी हुई हैं। सड़क निर्माण के कारण मैनहोल के मुंह बंद होने से पूरा ड्रेनेज सिस्टम ब्लॉक हो गया है। इसके चलते गंदा और दूषित पानी लोगों के घरों और शौचालयों में वापस (बैकफ्लो) आ रहा है।

दो दिनों से घरों में भरा है गंदा पानी:

जानकीविहार के स्थानीय निवासी सुनील कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वह पिछले दो दिनों से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उनके घर के भीतर सीवर का गंदा पानी बैकफ्लो मार रहा है, जिससे दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। क्षेत्र के दर्जनों अन्य परिवारों का भी यही हाल है।

ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) बन रहा है चोकिंग का मुख्य कारण

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, नालियों का सीवर नेटवर्क से सीधे जुड़ा होना बेहद खतरनाक है। नालियों के खुले होने के कारण उनमें बहने वाला प्लास्टिक, मिट्टी, पॉलीथीन और अन्य ठोस अपशिष्ट (सॉलिड वेस्ट) आसानी से सीवर लाइनों के भीतर पहुंच जाता है। मैनहोल बंद होने की स्थिति में यह कचरा अंदर ही अंदर जमा हो जाता है और पूरी सीवर लाइन चोक हो जाती है, जो वर्तमान में बैकफ्लो का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

अधिकारियों की लापरवाही: आपसी समन्वय (Coordination) का घोर अभाव

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों का स्पष्ट कहना है कि यदि सड़क निर्माण कार्य शुरू करने से पहले निर्माण एजेंसी या संबंधित विभाग ने जलकल विभाग एवं सीवर का काम देखने वाली अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ आपसी समन्वय स्थापित किया होता, तो यह नौबत नहीं आती।

यदि समय रहते योजना बनाकर इन 20 सीवर मैनहोल चैंबरों को पहले ही चिन्हित (Mark) कर लिया जाता, तो सड़क बनते समय इन्हें सुरक्षित ऊपर उठाया जा सकता था। विभागों के बीच आपसी संवादहीनता की भारी कीमत आज आम जनता को चुकानी पड़ रही है।

दबे मैनहोलों को खोजने के लिए मैदान में उतरी सुएज इंडिया की टीम

मामले की गंभीरता और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए सुएज इंडिया (Suez India) की तकनीकी टीम को क्षेत्र में उतारा गया है। सुएज की टीम आधुनिक उपकरणों और पारंपरिक तरीकों से सड़क के नीचे दबे हुए सीवर मैनहोलों की तलाश कर रही है। टीम का लक्ष्य इन चैंबरों को जल्द से जल्द ढूंढकर, उन्हें खोलना और ब्लॉक हो चुकी सीवर लाइन की सफाई कर क्षेत्रवासियों को इस नरकीय स्थिति से तत्काल राहत दिलाना है।

जनता की मांग: निर्माण से पहले अनिवार्य हो 'NoC' और विभागों का तालमेल

जानकीविहार के निवासियों ने नगर निगम और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि भविष्य में किसी भी वॉर्ड में सड़क या नाली निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित जलकल और सीवर विंग से एनओसी (NoC) या संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य किया जाए। विकास कार्यों के नाम पर जनता को असुविधा में डालना कतई न्यायसंगत नहीं है।

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