लखनऊ: 5000 वर्ष पुराने जपतीबाग मंदिर में हनुमान जी का दिव्य अभिषेक, गर्मी से राहत और किसानों की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना

Lucknow: Divine *Abhishek* of Lord Hanuman at the 5,000-year-old Japtibagh Temple; special prayers offered for relief from the heat and the prosperity of farmers.
 
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लखनऊ। ज्येष्ठ मास के पावन चौथे बड़े मंगल के अवसर पर राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक और अति प्राचीन जपतीबाग हनुमान मंदिर में 'दिव्य अभिषेक महोत्सव' अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में भगवान बजरंगबली का दुग्ध अभिषेक, इत्र अभिषेक और गंधधोधक पूजन कर 108 नामों से अर्चन किया गया।

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राष्ट्रहित और पर्यावरण के लिए विशेष प्रार्थना

तपिश और भीषण गर्मी से जूझ रहे आम जनमानस और अन्नदाताओं की समस्याओं को देखते हुए इस बार पूजा में विशेष संकल्प लिया गया। मंदिर के सेवादारों और पुरोहितों ने संकटमोचन हनुमान जी से प्रार्थना की कि वर्तमान समय में पड़ रही अत्यधिक गर्मी का प्रकोप कम हो, सूखा समाप्त हो और मौसम किसानों के अनुकूल व कल्याणकारी बने। इसके साथ ही देश की उन्नति, सामाजिक सौहार्द और धर्म रक्षा के लिए भी सामूहिक प्रार्थना की गई।

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विधि-विधान से संपन्न हुआ अनुष्ठान

यह भव्य आयोजन मंदिर के मुख्य पुजारी पवन तिवारी 'अखंड' के कुशल दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ। आचार्य राजीव मिश्रा और पंडित हर्ष बाजपेई ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया।

  • मुख्य सहभागी: इस अवसर पर श्री राजेंद्र प्रसाद तिवारी, शिवार्थ शुक्ला, रिशु गुप्ता, देवेंद्र मिश्रा, अनुराग गुप्ता, कृष्ण कुमार गुप्ता, कन्हैया मामा, राघव जी, केशव जी और जीतू रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • ध्वज पूजन और महाप्रसाद: कार्यक्रम के उत्तरार्ध में हनुमान जी के पवित्र ध्वज का पूजन किया गया, जिसके बाद आरती संपन्न हुई। पूजा के पश्चात उपस्थित भक्तों के बीच चरणामृत और महाप्रसाद का वितरण किया गया।

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जपतीबाग मंदिर: त्रेतायुगीन इतिहास और दंडवती परिक्रमा की परंपरा

लखनऊ के इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास बेहद अनूठा और गौरवशाली है:

  • 5000 वर्ष प्राचीन: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गोमती तट पर स्थित जपतीबाग हनुमान मंदिर लगभग पांच हजार साल पुराना है।

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  • ऐतिहासिक मेला: लखनऊ में बड़े मंगल पर लगने वाले पारंपरिक मेलों में यह सबसे पुराना और प्रमुख केंद्र माना जाता है।

  • दंडवती परिक्रमा: यहाँ मन्नत पूरी होने पर दंडवती परिक्रमा (लेटकर परिक्रमा) करने का विशेष विधान है। इस चौथे बड़े मंगल पर भी कई बच्चों और युवाओं ने पूरी आस्था के साथ मंदिर परिसर में दंडवती परिक्रमा की परंपरा को निभाया।

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