लखनऊ: अधिवक्ता अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के विरोध में वकीलों का 'कैंडल मार्च', तत्काल रिहाई की मांग

अवध बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्रवाई को बताया 'दुर्भावनापूर्ण'; न्यायिक स्वतंत्रता पर प्रहार का लगाया आरोप।

 
लखनऊ: अधिवक्ता अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के विरोध में वकीलों का 'कैंडल मार्च', तत्काल रिहाई की मांग
लखनऊ | 06 जनवरी, 2026 ग्वालियर उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष श्री अनिल मिश्रा की हालिया गिरफ्तारी के विरोध में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अधिवक्ताओं में भारी रोष है। सोमवार शाम अवध बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ के बाहर एक शांतिपूर्ण 'कैंडल मार्च' निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया और वरिष्ठ अधिवक्ता की तत्काल रिहाई की मांग की।

गेट संख्या-6 से उमेश चन्द्र चौराहा तक गूंजा विरोध

अधिवक्ताओं का यह शांतिपूर्ण मार्च हाई कोर्ट लखनऊ के गेट संख्या-6 से प्रारंभ हुआ और उमेष चन्द्र चौराहा तक निकाला गया। हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां लेकर अधिवक्ताओं ने संदेश दिया कि वे अपने साथी के साथ होने वाले किसी भी अन्याय के खिलाफ एकजुट हैं।

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 प्रमुख मांगें और मुद्दे

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने इस गिरफ्तारी को लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिवक्ता सम्मान पर सीधा हमला करार दिया। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • तत्काल रिहाई: श्री अनिल मिश्रा जी को बिना किसी देरी के रिहा किया जाए।

  • मुकदमे वापसी: उनके विरुद्ध दर्ज सभी 'कहा जा रहा दुर्भावनापूर्ण' मामलों को तुरंत वापस लिया जाए।

  • हस्तक्षेप की अपील: केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

नेतृत्व और एकजुटता

इस विरोध प्रदर्शन का संयुक्त नेतृत्व उच्च न्यायालय लखनऊ के अधिवक्ता शशांक अग्निहोत्री एवं राजेश्वर प्रसाद मिश्र द्वारा किया गया। मार्च के दौरान वकीलों ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता समाज किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और दमनकारी कार्रवाई के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष जारी रखेगा।

समाजसेविका रागिनी अवस्थी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस मार्च के माध्यम से न्यायप्रिय नागरिकों से भी इस संघर्ष को नैतिक समर्थन देने की अपील की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए वकीलों का निर्भीक होकर कार्य करना अनिवार्य है, और ऐसी गिरफ्तारियां न्यायपालिका के मनोबल को प्रभावित करती हैं।

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