Lucknow LDA: गोमतीनगर में EWS मकानों के अवैध उपयोग परिवर्तन का आरोप, अधिवक्ता ने एलडीए से की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित गोमतीनगर क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आवंटित आवासीय भवनों के व्यावसायिक व धार्मिक (मस्जिद) उपयोग में परिवर्तन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रदीप कुमार वर्मा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवंटित ईडब्ल्यूएस भवनों का उद्देश्य पात्र गरीब परिवारों को छत मुहैया कराना है, न कि बिना विधिक अनुमति के उनका भू-उपयोग बदलना।
क्या है मुख्य विवाद और शिकायत?
अधिवक्ता प्रदीप कुमार वर्मा के अनुसार, गोमतीनगर के विनय खंड स्थित भवन संख्या ई-1/363 को वर्ष 2002 में सक्षम अधिकारियों के आदेश पर मस्जिद के रूप में विवादित एवं नियम-विरुद्ध उपयोग के चलते सील कर दिया गया था।
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सील तोड़ने का आरोप: शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में मुशीर अहमद, शादाब बेग एवं रुखसाना बेगम द्वारा उस सील को अवैध रूप से तोड़कर भवन का उपयोग पुनः मस्जिद के रूप में शुरू कर दिया गया।
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FIR दर्ज: इस संबंध में पुलिस प्रशासन को बार-बार दी गई शिकायतों के आधार पर थाना गोमती नगर में अपराध संख्या 222/2026 (दिनांक 10 जून 2026) के तहत संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की जा चुकी है।
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10 अन्य भवनों का भी मामला: आरोप है कि प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई न होने के चलते क्षेत्र के लगभग 10 अन्य आवासीय भवनों का भी इसी तरह से अवैध रूप से उपयोग परिवर्तन कर लिया गया है।
सार्वजनिक असुविधा और सामाजिक तनाव की चिंता
अधिवक्ता का कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में बिना अनुमति के धार्मिक या सार्वजनिक गतिविधियों के कारण:
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अत्यधिक भीड़ जुटने से सार्वजनिक मार्ग बाधित होते हैं।
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स्थानीय निवासियों को आवागमन और वाहनों की पार्किंग में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध करने या शिकायत करने पर विवाद और मारपीट की स्थितियां उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने कहा कि एलडीए द्वारा 18 जून 2026 को इस संबंध में प्राथमिक प्रशासनिक कार्रवाई तो की गई थी, लेकिन समयावधि बीत जाने के बाद भी कोई ठोस व अंतिम कदम नहीं उठाया गया।
एलडीए और प्रशासन से प्रमुख मांगें:
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समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच: गोमतीनगर के उन सभी ईडब्ल्यूएस भवनों की पारदर्शी जांच कराई जाए, जिनके आवासीय उपयोग के स्थान पर गैर-आवासीय या मस्जिद के रूप में उपयोग की शिकायतें हैं।
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कानूनी कार्रवाई व अर्थदंड: 'उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम' के तहत नियम उल्लंघनकर्ताओं पर समान रूप से दंडात्मक कार्रवाई की जाए और अवैध उपयोग की अवधि के आधार पर भारी अर्थदंड (Penalty) लगाया जाए।
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मूल शर्तों की बहाली: अवैध उपयोग बंद कराकर भवनों का उपयोग आवंटन की मूल शर्तों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए, ताकि सरकार की कल्याणकारी योजना की मूल भावना सुरक्षित रहे।
"कानून की मंशा किसी समुदाय को लक्षित करना नहीं" अधिवक्ता प्रदीप कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि इस कानूनी पहल का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय विशेष को लक्षित करना नहीं है, बल्कि सरकारी योजना के तहत गरीबों के लिए बने आवासों की पवित्रता बनाए रखना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बेहतर करना है।
