लखनऊ: मनोज कुमार पांडेय के आरोप पूरी तरह निराधार, बैंक की सभी ऋण प्रक्रियाएं नियमों के तहत: शाखा प्रबंधक
लखनऊ: नॉर्दर्न रेलवे मल्टी स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की ऋण प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को लेकर हाल ही में लगाए गए आरोपों को बैंक प्रबंधन ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। प्रयागराज शाखा के प्रबंधक छोटे लाल वर्मा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि एक गैर-मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियन के महामंत्री मनोज कुमार पांडेय द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। बैंक ने इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी कर्मचारियों और आम जनता से किसी भी प्रकार की भ्रामक व अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करने की पुरजोर अपील की है।
नियमों और पारदर्शिता के अनुरूप संचालित होती हैं ऋण प्रक्रियाएं
बैंक की साख और पारदर्शिता को स्पष्ट करते हुए प्रयागराज शाखा के प्रबंधक छोटे लाल वर्मा ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों को ऋण (Loan) प्रदान करने की पूरी व्यवस्था निर्धारित बैंकिंग नियमों, प्रचलित प्रावधानों और कड़े वैधानिक दिशानिर्देशों के अनुसार ही संचालित की जाती है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा करना बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर नियमों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता है।
क्या है डिमांड राशि का पूरा गणित और ESF खाता?
आरोपों का तकनीकी और तथ्यात्मक जवाब देते हुए शाखा प्रबंधक ने ऋण प्रक्रिया की पारदर्शिता को इस प्रकार स्पष्ट किया:
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2 प्रतिशत ईएसएफ कटौती: बैंक द्वारा जब भी किसी रेलवे कर्मचारी को ऋण स्वीकृत किया जाता है, तो निर्धारित प्रावधानों के तहत डिमांड राशि का 2 प्रतिशत हिस्सा ईएसएफ (ESF) खाते में जमा किया जाता है।
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परिवार को आर्थिक सुरक्षा: यह कटौती कर्मचारियों के कल्याण के लिए है। यदि ऋण अवधि के दौरान किसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है, तो इसी ईएसएफ खाते में जमा राशि से उसके बकाया ऋण का पूरा भुगतान कर दिया जाता है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुखी परिवार पर भविष्य में कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि और गंभीर आरोपों का उल्लेख
बैंक प्रबंधन ने अपने बयान में शिकायतकर्ता मनोज कुमार पांडेय की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए हैं। बयान के अनुसार, मनोज कुमार पांडेय एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी हैं और वर्तमान में एक गैर-मान्यता प्राप्त रेलवे यूनियन के महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
बैंक प्रबंधन ने दावा किया कि उन पर पूर्व में अपने पुत्र के साथ मिलकर रेलवे सहित अन्य सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप लग चुके हैं, जिससे जुड़ी खबरें पूर्व में विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में भी उन पर को-ऑपरेटिव बैंक से ऋण दिलाने के नाम पर कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित रूप से अवैध वसूली करने और सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रयागराज स्थित घनश्याम नगर रेलवे कॉलोनी के सरकारी आवास (549-एच) पर अनधिकृत कब्जा बनाए रखने के आरोप हैं।
भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने की अपील
शाखा प्रबंधक छोटे लाल वर्मा ने अपने बयान के अंत में कहा, "बैंक की समूची ऋण प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित होती है। बैंक के खिलाफ किए जा रहे दुष्प्रचार और लगाए गए भ्रामक आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। हम अपने सभी खाताधारकों, रेल कर्मचारियों और आमजन से अपील करते हैं कि वे ऐसी किसी भी अफवाह या अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें।"
