स्वच्छता के नाम पर 'जहर' घोल रहा लखनऊ नगर निगम: खुले में कूड़ा जलाकर दांव पर लगा रहे राजधानी की सांसें

Lucknow Municipal Corporation is spreading 'poison' in the name of cleanliness: Burning garbage in the open, putting the capital's life at stake.
 
स्वच्छता के नाम पर 'जहर' घोल रहा लखनऊ नगर निगम: खुले में कूड़ा जलाकर दांव पर लगा रहे राजधानी की सांसें
लखनऊ, 6 मार्च 2026: एक ओर जहाँ लखनऊ को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के कर्मचारी ही पर्यावरण नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। राजधानी की सड़कों को साफ दिखाने की होड़ में सफाईकर्मी कूड़ा उठाने के बजाय उसे जलाना ज्यादा आसान समझ रहे हैं, जिससे शहर की हवा और भी जहरीली होती जा रही है।

राजाजीपुरम: स्कूल के बाहर ही लगा दी आग

ताजा मामला जोन-2 के राजाजीपुरम वार्ड का है। यहाँ सी-ब्लॉक स्थित सेंट जोसेफ विद्यालय के ठीक बाहर सफाईकर्मियों ने कूड़े के ढेर को उठाने की जहमत उठाने के बजाय उसमें आग लगा दी। धुएं के गुबार से बच्चों और स्थानीय लोगों का दम घुटने लगा, जिसके बाद नागरिकों ने खुद पानी डालकर आग बुझाई। हैरानी की बात यह है कि यह सब नगर निगम के सुपरवाइजरों और जोन अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन वे अनजान बने हुए हैं।

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तालकटोरा का AQI 'खतरनाक' स्तर पर

प्रदूषण के आंकड़े डराने वाले हैं। राजधानी के तालकटोरा इलाके का AQI फिलहाल 180-200 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में खुलेआम कूड़ा जलाना हवा की गुणवत्ता को बद से बदतर बना रहा है।

संविधान का उल्लंघन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51-ए के तहत पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक और सरकारी संस्था का मौलिक कर्तव्य है। लेकिन जिम्मेदार विभाग खुद ही इन संवैधानिक मूल्यों का मजाक बना रहा है।

कानून सख्त, पर कार्रवाई सिफर

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत खुले में कूड़ा जलाने पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके, लखनऊ में अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर महापौर या नगर आयुक्त द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल यह उठता है कि क्या केवल स्पष्टीकरण मांग लेने से राजधानी की हवा साफ हो जाएगी?

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