Lucknow News: कमीशन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर लखनऊ में कोटेदारों का हल्लाबोल, 2027 चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी
Ration Dealers Protest in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारबाग इलाके में प्रदेशभर से आए हजारों राशन कोटेदारों ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। 'ऑल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर एसोसिएशन' के आह्वान पर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में कोटेदारों ने मानदेय/कमीशन में बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने की मांग उठाई।
चारबाग में एकत्र हुए राशन विक्रेताओं ने विधानसभा घेराव के लिए पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन मुस्तैद जिला प्रशासन व पुलिस बल ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए ईको गार्डन भेज दिया।
📢 कोटेदारों की मुख्य 6 सूत्रीय मांगें
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष गिरीश तिवारी ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
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कमीशन में वृद्धि: अन्य पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के कोटेदारों का कमीशन भी तत्काल बढ़ाया जाए।
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उचित पारिश्रमिक: कोटेदारों के काम के अनुसार न्यूनतम और सम्मानजनक मानदेय तय किया जाए।
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ई-पॉश (e-PoS) की समस्याएं: ई-पॉश मशीनों से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों का स्थायी समाधान निकाला जाए।
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अतिरिक्त कार्यों का भुगतान: राशन वितरण के अलावा कराए जाने वाले सरकारी कार्यों का अलग से उचित भुगतान मिले।
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सामाजिक सुरक्षा: कोटेदारों और उनके परिवारों के लिए जीवन बीमा व स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की जाएं।
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अन्य स्थानीय समस्याएं: खाद्यान्न उठान और तौल से जुड़ी प्रशासनिक समस्याओं का त्वरित निस्तारण हो।
⚠️ 'मांगें न मानने पर 2027 चुनाव का करेंगे बहिष्कार'
एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष गिरीश तिवारी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राशन विक्रेता लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यदि शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो प्रदेश के सभी कोटेदार मजबूर होकर आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे।
चारबाग में हुए इस विशाल प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए हजारों की संख्या में राशन विक्रेताओं और एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।राजधानी में हुए इस उग्र प्रदर्शन के बाद अब देखना होगा कि खाद्य एवं रसद विभाग तथा उत्तर प्रदेश सरकार कोटेदारों की इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है।
