लखनऊ: "प्रभु की सेवा में कोई रिटायर नहीं होता" नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन बोले जगद्गुरु रामभद्राचार्य, उमड़ी भारी भीड़

Lucknow: "No one retires from the service of the Lord"—Jagadguru Rambhadracharya declares on the second day of the nine-day Ramkatha; massive crowds gather.
 
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लखनऊ: राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित 'बृज की रसोई' परिसर में आयोजित हो रही नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के श्रीमुख से बह रही ज्ञान और भक्ति की रसगंगा में गोते लगाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त कथा स्थल पहुँचे।

कथा के दूसरे दिन जगद्गुरु ने जीवन में कर्मयोग की महत्ता और प्रभु भक्ति के सच्चे स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला।

"ईमानदारी से कर्म करने पर अधिकार खुद चलकर आता है"

व्यासपीठ से भक्तों को संबोधित करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भों के जरिए कर्मयोग का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में कर्म पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण भाव के साथ करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट किया है कि मनुष्य का अधिकार केवल उसके कर्म पर है, फल पर नहीं। यदि कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करता है, तो अधिकार स्वयं उसके पास चलकर आता है। सफलता का मार्ग केवल कर्तव्यपरायणता से ही संभव है।"

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राघवेंद्र सरकार की सेवा ही सच्ची सेवा

सरकारी नौकरियों और ईश्वर की भक्ति के बीच एक सुंदर तुलना करते हुए जगद्गुरु ने कहा कि सांसारिक और सरकारी सेवाओं में तो एक निश्चित उम्र के बाद इंसान सेवानिवृत्त (Retire) हो जाता है, लेकिन राघवेंद्र सरकार (भगवान श्री राम) की सेवा में कोई कभी रिटायर नहीं होता।

उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि भगवान की चाकरी करने वालों को बुढ़ापे में पेंशन की भी चिंता नहीं रहती, क्योंकि स्वयं प्रभु अपने अनन्य भक्तों के 'योगक्षेम' (भरण-पोषण और सुरक्षा) का दायित्व अपने हाथों में ले लेते हैं। इसी के साथ उन्होंने आज की युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपने समय का एक बड़ा हिस्सा लोकमंगल, समाज कल्याण और ईश्वर के चिंतन में लगाएं।

कथा में पहुंचे कई वीआईपी, लिया व्यासपीठ का आशीर्वाद

रामकथा के दूसरे दिन आध्यात्मिक रसपान करने के लिए समाज के कई प्रतिष्ठित और विशिष्ट लोग भी कथा स्थल पर मौजूद रहे, जिन्होंने व्यासपीठ का पूजन कर जगद्गुरु का आशीर्वाद लिया। इनमें मुख्य रूप से:

  • राजनीतिक व्यक्तित्व: उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी और स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा।

  • संत समाज: नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी के पूज्य महंत पवन दास जी महाराज।

  • शिक्षा जगत: जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति।

भजन-कीर्तन और 'जय श्रीराम' के उद्घोष से पूरा वातावरण अत्यधिक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया। आयोजकों के अनुसार, आने वाले दिनों में कथा के प्रसंग और भी अलौकिक होने वाले हैं।

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