लखनऊ विज्ञान नगरी: पर्यावरण दिवस पर बच्चों ने पोस्टर मेकिंग से दिया प्रकृति बचाने का संदेश; परिसर में हुआ पौधारोपण

Lucknow Science City: Children conveyed the message of saving nature through poster making on Environment Day; a tree plantation drive was held on the premises.
 
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लखनऊ: विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर राजधानी के अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान नगरी (Regional Science City), लखनऊ में बच्चों और आम जनता के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति अलख जगाने के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस हरित अभियान में विभिन्न स्कूलों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और विज्ञान प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की और प्रकृति को सहेजने का संकल्प लिया।

आज की दुनिया में पर्यावरण को बचाना सबसे बड़ी जरूरत" — स्वरूप मंडल

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ के परियोजना समन्वयक (Project Coordinator) श्री स्वरूप मंडल ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। उन्होंने आज के आधुनिक और औद्योगिक दौर में विश्व पर्यावरण दिवस की महत्ता और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विज्ञान और तकनीक का उपयोग प्रकृति को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि उसे संरक्षित करने के लिए करें।

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पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने उकेरे प्रकृति के रंग

पर्यावरण दिवस को रचनात्मक बनाने के लिए स्कूली बच्चों के लिए एक पोस्टर मेकिंग और चित्रकला प्रतियोगिता सहित कई अन्य ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

  • बच्चों का हुनर: छात्रों ने अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से चार्ट पेपर पर ग्लोबल वार्मिंग, जल संरक्षण और पेड़ों के महत्व को बेहद खूबसूरती से दर्शाया।

  • सम्मान: प्रतियोगिताओं के समापन पर निर्णायक मंडल द्वारा चुने गए विजेताओं को उनके उत्कृष्ट और रचनात्मक विचारों के लिए आकर्षक पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

"प्रकृति से जुड़ें और उससे निस्वार्थ प्यार करें" — शिखा राज

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित 'ग्रेसियस ग्लोरी इनोवेटिव एजुकेशन फाउंडेशन' की फाउंडर और सीईओ शिखा राज ने 'विज्ञान और पर्यावरण' विषय पर एक बेहद लोकप्रिय और रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने बच्चों को बेहद सरल शब्दों में समझाया कि कैसे हमारा अस्तित्व पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर है। उन्होंने छात्रों को "प्रकृति से जुड़ने और प्रकृति से सच्चा प्यार करने" के लिए प्रेरित करते हुए रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इको-फ्रेंडली आदतें अपनाने की सलाह दी।

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परिसर में रोपे गए पौधे

व्याख्यान और प्रतियोगिताओं के साथ-साथ विज्ञान नगरी परिसर में एक व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम भी चलाया गया। संस्थान के अधिकारियों, अतिथियों और नन्हे बच्चों ने मिलकर परिसर के विभिन्न हिस्सों में छायादार और औषधीय पौधे रोपे। साथ ही बच्चों ने यह जिम्मेदारी भी ली कि वे इन पौधों को नियमित रूप से पानी देंगे और उनकी पूरी देखभाल करेंगे।

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