लखनऊ: तखवा गांव में 14 फीट गहरे सीवर मैनहोल का सफल पुनर्निर्माण, 900 से अधिक परिवारों को सीवर ओवरफ्लो से मिली मुक्ति
50 साल पुरानी क्षतिग्रस्त संरचना बनी थी मुसीबत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा लगभग 50 वर्ष पूर्व सीवर लाइन डाली गई थी। समय बीतने के साथ चूहों द्वारा खोदे जाने और प्राकृतिक क्षरण के कारण इस पुरानी लाइन को भारी क्षति पहुंची थी। मैनहोल के भीतर की दीवारें पूरी तरह से ढह चुकी थीं, जिसके कारण सीवर का पानी सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पा रहा था और आए दिन सड़कों पर ओवरफ्लो की स्थिति पैदा हो रही थी। मैनहोल की गहराई 14 फीट से अधिक होने के कारण इसका दोबारा निर्माण करना तकनीकी रूप से बेहद जोखिम भरा और कठिन काम था।
सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
चूंकि कार्य अत्यंत गहराई और खतरनाक माहौल में होना था, इसलिए सुएज प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी। पूरे कार्य के दौरान निम्नलिखित कड़े सुरक्षा उपाय अपनाए गए:
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सुरक्षा बैरिकेडिंग: राहगीरों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए कार्यस्थल के चारों तरफ मजबूत बैरिकेडिंग की गई।
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गैस मॉनिटरिंग: जहरीली गैसों के खतरे से निपटने के लिए आधुनिक गैस मॉनिटरिंग उपकरणों का उपयोग किया गया।
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हाई-टेक सेफ्टी गियर्स: कार्य में जुटे सभी कर्मचारियों को अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए।
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प्रशिक्षित स्टाफ: केवल अनुभवी और प्रशिक्षित तकनीकी टीम को ही इस संवेदनशील कार्य में तैनात किया गया।
900 से अधिक घरों को मिली बड़ी राहत
इन दोनों विशाल मैनहोलों के नए सिरे से तैयार हो जाने के बाद तखवा गांव और आसपास के करीब 900 से अधिक घरों के परिवारों को सीवर चोकिंग और गंदगी की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल गई है। स्थानीय निवासियों ने इस त्वरित और सुरक्षित समाधान के लिए प्रबंधन का आभार व्यक्त किया है।
"सुरक्षित और स्थायी समाधान हमारी प्राथमिकता" — रजनीश शर्मा सुएज के नेटवर्क मैनेजर रजनीश शर्मा ने इस सफलता पर बात करते हुए कहा, “पुराने मैनहोल की आंतरिक दीवारें और ढांचा पूरी तरह नष्ट हो चुका था, जिसके कारण यह काम हमारे लिए एक बड़ी परीक्षा जैसा था। हमारी टीम ने बिना किसी समझौते के सभी सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस कार्य को अंजाम दिया। हमारा मुख्य उद्देश्य केवल मरम्मत करना नहीं, बल्कि जनता को एक सुरक्षित, स्वच्छ और दीर्घकालिक व्यवस्था देना है।”
