लखनऊ: शिक्षा के अधिकार (RTE) पर 'अपात्रों' का कब्ज़ा, क्या बेसिक शिक्षा विभाग ही उड़ा रहा नियमों की धज्जियाँ?
व्यवस्था की खामियां
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फर्जीवाड़े का बोलबाला: आलीशान घरों और लग्जरी कारों के मालिक महज 80 हजार रुपये सालाना आय का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर गरीबों के हक पर डाका डाल रहे हैं।
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उसी स्कूल में दोबारा दाखिला: जो बच्चे पहले से ही किसी प्रतिष्ठित स्कूल में फीस देकर पढ़ रहे हैं, उनके अभिभावक विभाग की मिलीभगत से उन्हें उसी स्कूल में RTE कोटे के तहत 'फ्री' एडमिशन दिलाने का दबाव बना रहे हैं।
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वार्ड नियमों की अनदेखी: कानूनन प्रवेश बच्चे के निवास वाले वार्ड में ही होना चाहिए, लेकिन मिलीभगत के खेल में दूसरे वार्ड के स्कूलों में भी धड़ल्ले से दाखिले कराए जा रहे हैं।
राजाजीपुरम का मामला: सिस्टम की विफलता का उदाहरण
लखनऊ के राजाजीपुरम क्षेत्र के एक नामी विद्यालय में नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का एक अनोखा मामला सामने आया है। एक बच्चा जो पहले से ही उसी विद्यालय की UKG कक्षा में नियमित छात्र के रूप में पढ़ रहा है, उसका नामांकन RTE पंजीकरण संख्या 272282 के तहत उसी स्कूल में LKG के लिए कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि अब अभिभावक विभाग के अधिकारियों के माध्यम से उसी स्कूल पर 'कक्षा एक' में प्रवेश देने का अनुचित दबाव बना रहे हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन बच्चों के साथ अन्याय है जो वास्तव में इस योजना के पात्र हैं।
विभाग की चुप्पी या मिलीभगत?
ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी केवल 'लॉटरी' में अधिक से अधिक नाम निकालकर अपना लक्ष्य पूरा करने में लगे हैं। बच्चों के बैकग्राउंड का कोई भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं किया जा रहा है।जब तक RTE पोर्टल को आधार और पैन कार्ड से लिंक कर आय का सत्यापन नहीं किया जाता, तब तक पात्र लाभार्थी हाशिए पर ही रहेंगे।"
RTE के दुरुपयोग से उठते सवाल:
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विभाग पहले से पढ़ रहे बच्चों का डेटा U-DISE पोर्टल से क्रॉस-चेक क्यों नहीं करता?
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सक्षम परिवारों द्वारा फर्जी आय प्रमाण पत्र जमा करने पर आपराधिक कार्यवाही क्यों नहीं होती?
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क्या विभाग का काम सिर्फ लॉटरी निकालना है या यह सुनिश्चित करना भी कि लाभ 'असली गरीब' तक पहुँचे?
मुफ्त शिक्षा के नाम पर चल रहा यह खेल निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग के बीच विवाद की जड़ बनता जा रहा है। अगर समय रहते सत्यापन की प्रक्रिया को सख्त नहीं किया गया, तो RTE अधिनियम मात्र एक कागजी योजना बनकर रह जाएगा, जिसका लाभ सिर्फ वे लोग उठाएंगे जो नियम तोड़ने की कला में माहिर हैं।
