लखनऊ विश्वविद्यालय: आने वाली पीढ़ी को प्रदूषण मुक्त पर्यावरण देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी
लखनऊ:विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में लखनऊ विश्वविद्यालय के परिसर में एक वृहद और सघन वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। यह सराहनीय पहल ईआईएसीपी केन्द्र (EIACP), इंस्टीट्यूट ऑफ वाइल्डलाइफ साइंसेज, नीवा फाउंडेशन तथा प्राणी विज्ञान विभाग (Zoology Department)के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण करना, कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ावा देना और आम जनमानस को पर्यावरण के प्रति सजग बनाना था।
परिसर में रोपे गए चंदन, रुद्राक्ष और रोली सिंदूर के पौधे
इस हरित उत्सव की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी द्वारा की गई। कुलपति ने स्वयं अपने हाथों से चंदन, रुद्राक्ष और रोली सिंदूर के अत्यंत महत्वपूर्ण व पर्यावरणीय अनुकूल तीन पौधों का रोपण किया।
सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने एक बेहद गंभीर और विचारणीय संदेश दिया। उन्होंने कहाहम प्रकृति से जितना लेते हैं, उसे लौटाना भी हमारी जिम्मेदारी है। वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए, हमारी अगली पीढ़ी को एक शुद्ध, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण सौंपना हम सभी की सबसे बड़ी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वृक्षारोपण ही एकमात्र सबसे प्रभावी जरिया है।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों सहित 500 से अधिक लोगों ने दर्ज कराई उपस्थिति
विश्वविद्यालय में आयोजित इस सघन अभियान को वैश्विक और सामाजिक स्तर पर बड़ा समर्थन मिला। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें नीति-निर्माताओं, प्राध्यापकों और स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र-छात्राओं (International Students) ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 500 से अधिक पर्यावरण प्रेमियों ने इस अभियान में शामिल होकर अलग-अलग प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए।
प्रो. अमिता कनौजिया के कुशल संयोजन में सफल हुआ अभियान
इस वृहद वृक्षारोपण अभियान का सफल संयोजन प्राणी विज्ञान विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर और ईआईएसीपी की समन्वयक (Coordinator) प्रो. अमिता कनौजिया द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि परिसर में लगाए गए इन औषधीय और दुर्लभ पौधों की नियमित देखभाल की जाएगी ताकि ये भविष्य में विश्वविद्यालय को एक 'ग्रीन लंग' (हरित फेफड़ा) प्रदान कर सकें।

इन गणमान्य जनों की रही गरिमामयी उपस्थिति:
इस मौके पर संस्थान के वरिष्ठ शिक्षक और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञ मुख्य रूप से मौजूद रहे, जिनमें डॉ. विनीत मैक्सवेल डेविड, प्रो. असीश अवस्थी, प्रो. महेन्द्र अग्निहोत्री, डॉ. साची राय और डॉ. करुणाशंकर कनौजिया सहित अनेक शोधार्थी (Research Scholars) और कर्मचारी शामिल थे। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा पर्यावरण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के साथ हुआ।
