भीषण गर्मी से वन्यजीवों को बचाने के लिए लखनऊ चिड़ियाघर मुस्तैद: बाड़ों में लगे 50 कूलर और स्प्रिंकलर, डाइट में भी बदलाव
बाड़ों में 'छपाक-छई': स्प्रिंकलर और कूलर्स की फुहार
चिड़ियाघर के निदेशक संजय कुमार बिस्वाल ने बताया कि जानवरों को सीधे तौर पर गर्मी से बचाने के लिए बाड़ों में विशेष तकनीक और उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है:
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50 से अधिक कूलर: टाइगर, जिराफ और भालू जैसे जानवरों के बाड़ों में 50 से ज्यादा हाई-पावर कूलर लगाए गए हैं।
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स्प्रिंकलर सिस्टम: टाइगर, जिराफ और हिरन के बाड़ों में पानी के स्प्रिंकलर (फव्वारे) लगाए गए हैं, जिससे वन्यजीव ठंडे पानी की फुहारों में 'छपाक-छई' कर खुद को ठंडा रख रहे हैं।
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पॉण्ड्स की मरम्मत: बाड़ों के अंदर बने तालाबों की मरम्मत कर उनमें शीतल जल भर दिया गया है, ताकि जानवर घंटों पानी में रहकर गर्मी से राहत पा सकें।
पक्षियों के लिए 'ग्रीन नेट' और खस का इंतजाम
पक्षियों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए डक पॉण्ड और अन्य बर्ड बाड़ों को चारों तरफ से हरे पर्दे (ग्रीन नेट) से ढंक दिया गया है। इसके अलावा बाड़ों में चटाई और खस भी लगाए गए हैं, जिन्हें समय-समय पर गीला किया जाता है ताकि भीतर का तापमान नियंत्रित रहे।

खान-पान में बदलाव: मौसमी फलों की एंट्री
गर्मी के मौसम में वन्यजीवों की इम्यूनिटी और हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए उनके आहार में भी तब्दीली की गई है:
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शाकाहारी वन्यजीव: इनके भोजन में पानी से भरपूर मौसमी फल और ताजी सब्जियों को शामिल किया गया है।
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पीने का पानी: सभी बाड़ों में स्वच्छ और शीतल पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
दर्शकों की सुविधा का भी रखा ख्याल
प्राणि उद्यान का भ्रमण करने आने वाले पर्यटकों के लिए भी प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। चिड़ियाघर परिसर में पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया है, ताकि चिलचिलाती धूप में घूमने वाले दर्शकों को असुविधा न हो।


