लखनऊ की बेटी सृष्टि गुप्ता 'नारी सम्मान' से विभूषित, कराटे में शानदार प्रदर्शन के लिए मिला पुरस्कार
लखनऊ: "मेधा किसी की मोहताज नहीं होती, वह अपना मुकाम खुद हासिल कर लेती है।" इस कहावत को सच कर दिखाया है लखनऊ की होनहार बेटी सृष्टि गुप्ता ने। उत्तर प्रदेश सरकार के महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण अभियान के तहत, आलमबाग थाना क्षेत्र के आदर्श नगर पार्क में आयोजित एक भव्य 'बहू-बेटी सम्मेलन' के दौरान सृष्टि गुप्ता को उनकी उत्कृष्ट खेल प्रतिभा के लिए सम्मानित किया गया।
इस विशेष कार्यक्रम में आलमबाग के इंस्पेक्टर और उनकी पुलिस टीम द्वारा सृष्टि को कराटे के क्षेत्र में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए स्मृति चिह्न (शील्ड) देकर नवाजा गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद जनसमूह ने करतल ध्वनि (तालियों की गड़गड़ाहट) के साथ इस उभरती हुई नारी शक्ति का हौसला बढ़ाया।
उत्कृष्ट उपलब्धियों और सकारात्मक सोच को मिला मान
सृष्टि गुप्ता को न केवल उनकी खेल उपलब्धियों, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रगतिशील और सकारात्मक सोच के लिए भी इस सम्मान के योग्य चुना गया। 'मिशन शक्ति' के तहत आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों और महिलाओं की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करना तथा उन्हें आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
आधुनिक नारी: आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का प्रतीक
आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। पारंपरिक रूप से समाज में नारी को ममता, करुणा, त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति माना जाता रहा है, लेकिन आज की आधुनिक नारी इन मानवीय मूल्यों के साथ-साथ:
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शिक्षित और जागरूक है: वह अपने अधिकारों और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भली-भांति समझती है।
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आत्मनिर्भर है: आर्थिक और सामाजिक रूप से वह अपने पैरों पर खड़ी है।
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सशक्त और सुरक्षित है: आत्मरक्षा (जैसे कराटे और मार्शल आर्ट्स) के गुर सीखकर वह खुद अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है।
एक संदेश समाज के नाम:
"जिस घर-आंगन में बेटियां मुस्कुराती हैं और सुरक्षित महसूस करती हैं, वहीं असल मायने में खुशहाली, करुणा और ममता के फूल खिलते हैं। नारी शक्ति को प्रोत्साहित करना ही एक उन्नत समाज की पहचान है।"
