Maa Pateshwari University: एआई से लेकर थारू संस्कृति तक; माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में दिख रही आधुनिकता और विरासत की अनूठी जुगलबंदी, कुलपति ने दी प्रवेश की जानकारी
बलरामपुर, 07 जून 2026: उत्तर प्रदेश का देवीपाटन मंडल अब उच्च शिक्षा और नवाचार (Innovation) के एक नए युग का गवाह बन रहा है। भारत-नेपाल सीमा और तराई के आंचल में स्थित माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बेहद कम समय में पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख, आधुनिक और क्रांतिकारी शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है।
गौरतलब है कि 15 मार्च 2024 को गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया गया था। शिलान्यास के अल्प समय के भीतर ही इस संस्थान ने 10 संकायों (Faculties) और 37 विभागों (Departments) की सफल स्थापना कर आधुनिक, वैश्विक और बहुविषयी (Multidisciplinary) शिक्षा का एक अभूतपूर्व व सशक्त ढांचा खड़ा कर दिया है।
NEP-2020 के तहत अत्याधुनिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों की शुरुआत
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के मूल सिद्धांतों को अक्षरशः जमीन पर उतारते हुए विश्वविद्यालय ने मेजर-माइनर इंटरडिसिप्लिनरी मॉडल को पूरी तरह अपनाया है। इसके तहत छात्रों के करियर को वैश्विक स्तर पर चमकाने के लिए कई रोजगारपरक और अत्याधुनिक तकनीकी विषयों को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है:
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML)
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डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी
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क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी
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इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT)
भारतीय ज्ञान परंपरा और थारू संस्कृति को वैश्विक पहचान
विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जितनी तेजी से आधुनिक तकनीक को अपना रहा है, उतनी ही मजबूती से अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है। यहाँ की मिट्टी और इतिहास को समेटते हुए कुछ बेहद खास विषयों की पढ़ाई शुरू की गई है: विरासत का सम्मान: तराई क्षेत्र की अनूठी जनजातीय संस्कृति को सहेजने के लिए 'थारू हिस्ट्री, कल्चर एंड एम्पावरमेंट स्टडीज' जैसे अनूठे विषय की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही 'योगिक साइंस' और 'हिंदू स्टडीज एंड सोशल हार्मनी' जैसे पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा व सामाजिक समरसता को एक नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं।
क्षेत्रीय आवश्यकताओं और 'हरित रोजगार' पर विशेष ध्यान
भारत-नेपाल सीमा और ऐतिहासिक श्रावस्ती क्षेत्र की पर्यटन व भौगोलिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय ने अनूठे रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम तैयार किए हैं:
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स्पिरिचुअल टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी: बौद्ध सर्किट और शक्तिपीठ से जुड़े इस क्षेत्र में 'स्पिरिचुअल टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट' के जरिए पर्यटन क्षेत्र में करियर के नए द्वार खुलेंगे।
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हरित रोजगार (Green Jobs): पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए एनवायरनमेंटल स्टडीज, पॉल्यूशन कंट्रोल, वेस्ट मैनेजमेंट, एग्रोफॉरेस्ट्री, ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) तथा विशेष रूप से इस क्षेत्र की मुख्य फसल को केंद्र में रखकर 'एग्रोफॉरेस्ट्री एंड शुगर केन' (गन्ना अनुसंधान) जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं।
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शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्सेज: छात्रों के व्यावहारिक कौशल विकास (Skill Development) के लिए वेबसाइट डिजाइन, एनजीओ मैनेजमेंट, पब्लिक ओरेशन (भाषण कला), इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन, वैदिक मैथमेटिक्स और 'संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट एडिटिंग' जैसे सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाए जा रहे हैं।
चार जिलों के 182 महाविद्यालयों का नेतृत्व
माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय वर्तमान में देवीपाटन मंडल के चार प्रमुख जनपदों—बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती में उच्च शिक्षा के विस्तार और शोध (Research) के मुख्य केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। लगभग 182 संबद्ध महाविद्यालयों के विशाल नेटवर्क के साथ यह विश्वविद्यालय इस पिछड़े और सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं के लिए ज्ञान का आलोक बन चुका है।
एडमिशन अपडेट: प्रवेश प्रक्रिया शुरू
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रवि शंकर सिंह ने प्रवेश की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर 'प्रवेशिका' (Admission Brochure) उपलब्ध करा दी गई है। सभी इच्छुक प्रवेशार्थी और छात्र विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रवेश संबंधी विस्तृत निर्देशिका देख सकते हैं और अपना ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) आसानी से पूरा कर सकते हैं।
