मध्य प्रदेश उपचुनाव: क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव भाजपा के लिए जीत की गारंटी नहीं बन पा रहे?

Madhya Pradesh By-elections: Is Chief Minister Mohan Yadav failing to guarantee a win for the BJP?
 
मध्य प्रदेश उपचुनाव: क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव भाजपा के लिए जीत की गारंटी नहीं बन पा रहे?

भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार ने केवल एक सीट का राजनीतिक समीकरण नहीं बदला, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव अभी तक ऐसे नेता के रूप में स्थापित नहीं हो पाए हैं, जिनके नेतृत्व में उपचुनावों में जीत सुनिश्चित मानी जाए?

दतिया उपचुनाव में भाजपा ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई दौर के दौरे किए, जनसभाएं और रोड शो किए तथा विभिन्न सामाजिक समूहों से संवाद स्थापित किया। उनके साथ राज्य सरकार के 12 मंत्री चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी प्रचार किया। इसके अलावा प्रदेश के सांसद, विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी लगातार चुनावी अभियान में जुटे रहे।

इसके बावजूद भाजपा को सफलता नहीं मिली। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 66,757 मत हासिल किए, जबकि भाजपा प्रत्याशी अशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले। लगभग छह हजार मतों की हार ने भाजपा को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।

टिकट चयन भी बना चर्चा का विषय

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दतिया में टिकट वितरण भी हार का एक अहम कारण माना जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अंतिम समय में भाजपा ने अशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष देखने को मिला। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने नाराजगी दूर करने का प्रयास किया और नरोत्तम मिश्रा ने भी प्रचार किया, लेकिन चुनाव परिणाम से संकेत मिलता है कि संगठन के भीतर की नाराजगी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी।

उपचुनावों का रिकॉर्ड क्या कहता है?

मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में अब तक चार विधानसभा उपचुनाव हुए हैं—

  • अमरवाड़ा – भाजपा की जीत
  • बुधनी – भाजपा की जीत, लेकिन जीत का अंतर काफी कम हुआ
  • विजयपुर – भाजपा की हार
  • दतिया – भाजपा की हार

इस तरह चार में से दो सीटों पर जीत और दो पर हार का रिकॉर्ड भाजपा के लिए चिंतन का विषय माना जा रहा है।

बुधनी में भी घटा जीत का अंतर

बुधनी सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मजबूत गढ़ रही है। विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा ने एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन उपचुनाव में जीत का अंतर घटकर लगभग 13 हजार वोट रह गया। यद्यपि सीट भाजपा के पास बनी रही, लेकिन घटा हुआ अंतर संगठन के लिए संकेत माना जा रहा है।

विजयपुर में भी नहीं मिला लाभ

विजयपुर उपचुनाव में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए रामनिवास रावत को मंत्री बनाने के बाद उम्मीदवार बनाया था। सरकार और संगठन दोनों ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इससे यह संदेश गया कि केवल बड़े नेताओं का प्रचार जीत की गारंटी नहीं बन सकता।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

उपचुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उनके कार्यकाल में भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की, राज्यसभा चुनावों में सफलता हासिल की और अमरवाड़ा व बुधनी उपचुनाव भी जीते। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 की तुलना में दतिया में भाजपा के मतों में वृद्धि हुई है।

भाजपा करेगी समीक्षा

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी उपचुनाव परिणामों की विस्तृत समीक्षा करेगी और समीक्षा के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने संगठनात्मक अनुशासन पर भी जोर दिया।

आगे की चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया और विजयपुर की हार के पीछे स्थानीय कारण, टिकट चयन और क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण रहे हैं। इसलिए केवल मुख्यमंत्री के नेतृत्व को हार का एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा। फिर भी लगातार उपचुनावों के मिले-जुले परिणाम भाजपा के लिए चिंतन का विषय हैं।

अब आने वाले नगरीय निकाय चुनाव मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व की अगली बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं। यदि भाजपा वहां बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उपचुनावों की हार को स्थानीय परिस्थितियों का परिणाम माना जा सकता है। वहीं यदि अपेक्षित सफलता नहीं मिलती, तो मुख्यमंत्री के चुनावी नेतृत्व को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

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