मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: बढ़ती आय, सुदृढ़ होती अर्थव्यवस्था

Madhya Pradesh Economic Survey 2025-26: Rising Income, Strengthening Economy
 
मजबूत जीएसडीपी और आय में बढ़ोतरी  वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भावों पर 16.69 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो 2024-25 की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्थिर भाव (2011-12) पर GSDP 7.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को रेखांकित करता है। प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है—2011-12 में 38,497 रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,69,050 रुपये तक पहुंच गई, जो जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।  तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास  प्राथमिक क्षेत्र: GSVA 6.79 लाख करोड़ रुपये, 7.31% वृद्धि। कृषि, पशुपालन, वानिकी और खनन का महत्वपूर्ण योगदान।  द्वितीयक क्षेत्र: GSVA 3.12 लाख करोड़ रुपये, 9.93% वृद्धि। उद्योग, निर्माण और ऊर्जा सेवाओं में तेजी।  तृतीयक क्षेत्र: GSVA 5.85 लाख करोड़ रुपये, 15.80% वृद्धि—सबसे तेज रफ्तार। व्यापार, पर्यटन, वित्तीय सेवाएं और रियल एस्टेट प्रमुख चालक बने।  कृषि, उद्योग और सेवाओं में प्रगति  2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66% और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68% की वृद्धि।  दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंचा।  72,975 किमी ग्रामीण सड़कों और 40.82 लाख ग्रामीण आवासों से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ।  औद्योगिक क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटन, ₹1.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 1.7 लाख रोजगार संभावनाएं।  पर्यटन में 13.18 करोड़ पर्यटकों का आगमन।  वित्तीय अनुशासन और सामाजिक क्षेत्र  राज्य ने 618 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य दर्ज किया, कर राजस्व में 13.57% वृद्धि हुई और ऋण-GSDP अनुपात 31.3% रहा। स्वास्थ्य पर 34,112 करोड़ रुपये (GSDP का 3%) खर्च, 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड और मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट। शिक्षा के लिए बजट का 10.37% आवंटन, प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट शून्य और तकनीकी संस्थानों की संख्या 2,070 तक पहुंची।  नीति और दृष्टि  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली में प्राचीन अर्थशास्त्र की प्रेरणा भी दिखती है। महान अर्थशास्त्री चाणक्य के अर्थानुशासन के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार आर्थिक मूल्यों को सुदृढ़ कर रही है।  समग्र रूप से, मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि “अभ्युदय मध्यप्रदेश” की परिकल्पना ठोस नीतियों और परिणामों के साथ आगे बढ़ रही है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर राज्य के मजबूत योगदान को स्पष्ट करती है।

(सत्येंद्र जैन – विभूति फीचर्स)

मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस आर्थिक समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी नीतियों और विकासोन्मुख कार्यक्रमों की स्पष्ट झलक मिलती है, जिनके माध्यम से राज्य ने संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश, भारत को विश्व की सशक्त अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। इसका प्रमाण यह है कि देश की जीडीपी में राज्य का योगदान लगभग 3.25 प्रतिशत से बढ़कर करीब 5.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

मजबूत जीएसडीपी और आय में बढ़ोतरी

वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित भावों पर 16.69 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो 2024-25 की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। स्थिर भाव (2011-12) पर GSDP 7.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को रेखांकित करता है।
प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है—2011-12 में 38,497 रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1,69,050 रुपये तक पहुंच गई, जो जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास

  • प्राथमिक क्षेत्र: GSVA 6.79 लाख करोड़ रुपये, 7.31% वृद्धि। कृषि, पशुपालन, वानिकी और खनन का महत्वपूर्ण योगदान।

  • द्वितीयक क्षेत्र: GSVA 3.12 लाख करोड़ रुपये, 9.93% वृद्धि। उद्योग, निर्माण और ऊर्जा सेवाओं में तेजी।

  • तृतीयक क्षेत्र: GSVA 5.85 लाख करोड़ रुपये, 15.80% वृद्धि—सबसे तेज रफ्तार। व्यापार, पर्यटन, वित्तीय सेवाएं और रियल एस्टेट प्रमुख चालक बने।

कृषि, उद्योग और सेवाओं में प्रगति

  • 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66% और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68% की वृद्धि।

  • दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंचा।

  • 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों और 40.82 लाख ग्रामीण आवासों से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ।

  • औद्योगिक क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटन, ₹1.17 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 1.7 लाख रोजगार संभावनाएं।

  • पर्यटन में 13.18 करोड़ पर्यटकों का आगमन।

वित्तीय अनुशासन और सामाजिक क्षेत्र

राज्य ने 618 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य दर्ज किया, कर राजस्व में 13.57% वृद्धि हुई और ऋण-GSDP अनुपात 31.3% रहा।
स्वास्थ्य पर 34,112 करोड़ रुपये (GSDP का 3%) खर्च, 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड और मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट।
शिक्षा के लिए बजट का 10.37% आवंटन, प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट शून्य और तकनीकी संस्थानों की संख्या 2,070 तक पहुंची।

नीति और दृष्टि

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली में प्राचीन अर्थशास्त्र की प्रेरणा भी दिखती है। महान अर्थशास्त्री चाणक्य के अर्थानुशासन के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार आर्थिक मूल्यों को सुदृढ़ कर रही है।

समग्र रूप से, मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि “अभ्युदय मध्यप्रदेश” की परिकल्पना ठोस नीतियों और परिणामों के साथ आगे बढ़ रही है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर राज्य के मजबूत योगदान को स्पष्ट करती है।

Tags