मध्यप्रदेश स्थापना दिवस (1 नवम्बर) पर विशेष: प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में प्रगति पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश
(सुरेश पचौरी -विनायक फीचर्स) (लेखक: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री)
भारत का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश, जो 1 नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आया था, आज अपनी 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह दिवस मध्यप्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के अनुसार, अपने गठन और विभाजन के दौर में अनेक उतार-चढ़ाव देखने के बाद, यह राज्य अब प्रगति के नए सोपान तय कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विशेष मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में, डबल इंजन की सरकार में मध्यप्रदेश तरक्की की ठोस बुनियाद पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
विकासोन्मुखी अभियान और सुशासन
केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कल्याणकारी कदमों की सार्थकता जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच के तहत, जिसका संकल्प समाज के अंतिम छोर में बैठे व्यक्ति को भी लाभान्वित करना है, प्रदेश में तमाम जनहितैषी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पूरी टीम प्रदेशवासियों की सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
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खुशी की बात यह है कि अब कई राज्य मध्यप्रदेश को मॉडल मानकर यहाँ की योजनाओं को अपने यहाँ लागू कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश: विविधताओं का संगम
अतीत के आईने में मध्यप्रदेश का इतिहास, भूगोल और संस्कृति अनेक विविधताओं को समेटे हुए है:
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प्राकृतिक समृद्धि: प्रचुर वन संपदा, अथाह जल वाली नदियाँ (नर्मदा, सोन, चंबल, बेतवा आदि), विपुल खनिज भंडार, खूबसूरत पर्यटन स्थल और पुरातात्विक धरोहरें यहाँ उपलब्ध हैं।
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धार्मिक महत्व: धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, तो ओरछा में राम राजा विराजमान हैं।
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जीवनदायिनी नर्मदा: नर्मदा नदी को प्रदेश की जीवनदायिनी माना जाता है, जिसने सरदार सरोवर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की खुशहाली के द्वार खोले हैं।
केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में अव्वल
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देशन में मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है।
| योजना | क्रियान्वयन में स्थान | उपलब्धि (आँकड़े) |
| पीएम स्वनिधि योजना | देश में प्रथम | - |
| आयुष्मान भारत योजना | देश में प्रथम | 4.26 करोड़ हितग्राहियों को डिजिटल आयुष्मान कार्ड जारी। |
| पीएम आवास योजना (ग्रामीण) | अग्रणी | लगभग 38 लाख आवासों का निर्माण। |
| पीएम आवास योजना (शहरी) | अग्रणी | 8 लाख 50 हजार से ज्यादा आवास बनाए जा चुके हैं। |
| पीएम ग्राम सड़क योजना | अग्रणी | 89,612 किलोमीटर लंबी सड़कें बन चुकी हैं। |
अन्य प्रमुख योजनाओं में कृषि अवसंरचना निधि, प्रधानमंत्री मातृ-वंदना योजना, पीएम स्वामित्व योजना, नशामुक्त भारत अभियान, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन में भी प्रदेश अग्रणी है।
आर्थिक और कृषि विकास
मध्यप्रदेश सरकार की दूरगामी सोच के चलते राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिल रही है:
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प्रति व्यक्ति आय: वित्तीय वर्ष 2024-2025 में प्रति व्यक्ति की आय ₹1 लाख 52 हजार 615 हो गई है।
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कृषि विकास दर: म.प्र. की कृषि विकास दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है।
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गेहूँ निर्यात: म.प्र. गेहूँ निर्यात के मामले में देश में नम्बर एक पर है।
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दुग्ध उत्पादन: 2024-2025 में 225.75 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ, जिससे प्रदेश देश में तीसरे नम्बर पर है।
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किसान सहायता: मुख्यमंत्री किसान योजना के तहत प्रदेश के 83 लाख से अधिक किसानों के खाते में ₹17,500 करोड़ की सहायता राशि का अंतरण किया गया।
ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण
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विद्युत उत्पादन: स्थापित क्षमता 23,000 मेगावाट है, जिसमें 17,125 मेगावाट पारंपरिक और 5,875 मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा स्रोत से उत्पादित हो रही है। कृषि और उद्योगों को पर्याप्त बिजली मिल रही है।
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महिला सशक्तिकरण: मध्यप्रदेश में बेटी अब बोझ नहीं, वरदान बन गई है।
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लाड़ली बहना योजना: 1.27 करोड़ महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 दिए जा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहलों का अनुसरण देश के कई राज्यों ने किया है।
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अपार संभावनाओं वाला प्रदेश
मध्यप्रदेश जिस तेजी के साथ तरक्की कर रहा है, उसके मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि यह अपार संभावनाओं वाला प्रदेश बन रहा है, जिसमें समृद्ध राज्य बनने की क्षमता और संसाधन दोनों मौजूद हैं।
लेखक ने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।

