आत्मनिर्भर भारत की राह में मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक कदम: डॉ. मोहन यादव सरकार ने शिल्पकारों को दिया वैश्विक मंच
(डॉ. राघवेंद्र शर्मा-विभूति फीचर्स)
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए एक क्रांतिकारी पहल की है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा मृगनयनी (Mrignayanee) उत्पादों के ई-कॉमर्स पोर्टल का शुभारंभ करना, प्रदेश के लाखों शिल्पकारों और बुनकरों के जीवन में आर्थिक समृद्धि लाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
डिजिटल क्रांति से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट मानना है कि वर्तमान युग डिजिटल व्यापार का है। यदि हम अपनी पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक के साथ नहीं जोड़ेंगे, तो वह संग्रहालयों तक सीमित रह जाएगी। मृगनयनी पोर्टल के माध्यम से राज्य के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को ओएनडीसी (ONDC) जैसे विशाल प्लेटफॉर्म से एकीकृत किया गया है।
इस पहल की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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बिचौलियों का अंत: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिल्पकारों को उनकी मेहनत का सीधा लाभ मिल सकेगा।
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वैश्विक पहुंच: चंदेरी, महेश्वरी साड़ियाँ और जनजातीय कलाकृतियाँ अब वैश्विक खरीदारों के लिए एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।
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विस्तृत श्रेणी: वर्तमान में पोर्टल पर 15 श्रेणियों के 350 उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन्हें भविष्य में 1500 से अधिक करने का लक्ष्य है।
'वोकल फॉर लोकल' को मिला नया आयाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल से ग्लोबल' के मंत्र को साकार करते हुए, मध्यप्रदेश सरकार ने जिला स्तर पर लूम (करघा) केंद्रों को पुनर्जीवित करने पर बल दिया है। सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में 2 लाख से अधिक कारीगरों और 10 लाख उत्पादों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। यह न केवल एक आर्थिक आंकड़ा है, बल्कि उन लाखों परिवारों के पलायन को रोकने का एक ठोस ब्लू प्रिंट है जो अपनी कला पर निर्भर हैं।
प्रामाणिकता और आधुनिक पैकेजिंग
आज के दौर में उपभोक्ता उत्पाद की मौलिकता को महत्व देता है। मृगनयनी पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रामाणिकता प्रणाली है:
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प्रमाण-पत्र: ग्राहकों को हर उत्पाद के साथ प्रामाणिकता प्रमाण-पत्र और शिल्प विवरण कार्ड मिलेगा।
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GI टैग और ODOP: जीआई (GI) टैग प्राप्त उत्पादों और 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
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सांस्कृतिक राजदूत: मध्यप्रदेश का हर कारीगर अब डिजिटल बाजार के माध्यम से प्रदेश का सांस्कृतिक राजदूत बनकर उभरेगा।
सशक्त युवा और आत्मनिर्भर नारी का विजन
यह पोर्टल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बनेगा। घर बैठे अपनी कला को वैश्विक बाजार में बेचने की सुविधा 'विज़न 2047' के अनुरूप है, जहाँ आत्मनिर्भर नारी और सुरक्षित सांस्कृतिक विरासत की परिकल्पना की गई है। जनजातीय समुदायों की कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाना सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण, दोनों दिशाओं में एक बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह दूरदर्शी सोच मध्यप्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाली है। परंपरागत ज्ञान को आधुनिक प्रबंधन और तकनीक से जोड़कर मध्यप्रदेश सरकार ने न केवल शिल्पकारों के सपनों को नई उड़ान दी है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण में अपनी भूमिका को स्वर्णाक्षरों में अंकित कर दिया है।

