सावन के अंतिम सोमवार पर श्रद्धा और भक्ति के बीच संपन्न हुआ महामृत्युंजय यज्ञ
यज्ञ का संचालन अतुल कपूर ने वैदिक विधि-विधान के साथ किया। उन्होंने यज्ञ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है, जो वातावरण की शुद्धि के साथ मनुष्य के भीतर सकारात्मक और सृजनात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम बनती है। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव की आराधना और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ यज्ञ का आयोजन विशेष महत्व रखता है।

आयोजन की व्यवस्थाओं में रेखा सक्सेना, आशा गुप्ता, रजनी और अनु सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग किया। सभी के सामूहिक प्रयास से यज्ञ एवं पूजन कार्यक्रम सुचारु और श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।
कृष्णनेंदु राय ने मुख्य याजक के रूप में विधिवत पूजन-अर्चन कराया और यज्ञ में पूर्णाहुति प्रदान की। वहीं गोविंद रविशंकर एवं अपर्णा ने भगवान शिव का आवाहन कर विशेष पूजन संपन्न कराया। शिव आवाहन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से महादेव का स्मरण करते हुए सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की।

यज्ञ के दौरान गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के सामूहिक उच्चारण से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच यज्ञाग्नि में आहुतियां समर्पित कीं। भगवान महादेव को समर्पित विशेष स्वाहाकार मंत्रों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक आहुति दी।
आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में प्राकृतिक आपदाओं और विभिन्न सामाजिक चुनौतियों के बीच प्रकृति एवं समाज की रक्षा, सकारात्मक ऊर्जा के संवर्धन और सामूहिक कल्याण की भावना से यज्ञ में विशेष आहुतियां अर्पित की गईं। इस दौरान सृजनात्मक शक्ति, सद्बुद्धि, आत्मबल और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की गई।

श्रद्धालुओं ने महामृत्युंजय मंत्र की आध्यात्मिक शक्ति का स्मरण करते हुए भगवान शिव से सभी के जीवन में आरोग्य, शांति, सुरक्षा और सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। पूर्णाहुति, आरती और शांति पाठ के साथ महामृत्युंजय यज्ञ का विधिवत समापन हुआ।
