महाराष्ट्र के अध्ययन दल ने समझा लखनऊ की सीवरेज व्यवस्था का मॉडल
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय लखनऊ। महाराष्ट्र शासन के नगर प्रशासन निदेशालय से आए अध्ययन दल ने लखनऊ की सीवरेज प्रबंधन एवं सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली और तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली। अध्ययन दल में महाराष्ट्र जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (MJP), कोकण डिवीजन के मुख्य अभियंता प्रशांत भामरे तथा कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद के मुख्य अधिकारी मारुति गायकवाड़ शामिल रहे।
अध्ययन दल ने भरवारा स्थित 345 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का भ्रमण किया। इस दौरान सुएज के परियोजना निदेशक राजेश मठपाल ने अधिकारियों को प्लांट की विभिन्न इकाइयों और सीवेज उपचार की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
UASB तकनीक से होता है सीवेज का उपचार
राजेश मठपाल ने बताया कि एसटीपी में पहुंचने वाला सीवेज सबसे पहले स्क्रीनिंग और ग्रिट चैंबर से होकर गुजरता है। इस प्रक्रिया के दौरान ठोस कचरे और भारी पदार्थों को अलग किया जाता है। इसके बाद सीवेज को UASB (Upflow Anaerobic Sludge Blanket) रिएक्टर में भेजा जाता है, जहां जैविक प्रक्रिया के माध्यम से उसका उपचार किया जाता है।
इसके पश्चात उपचारित सीवेज प्री-एरेशन, पॉलिशिंग पोंड और क्लोरीन कॉन्टैक्ट चैंबर सहित विभिन्न चरणों से गुजरता है। निर्धारित उपचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद पानी को तय मानकों के अनुरूप आगे छोड़ा जाता है।भरवारा एसटीपी की डिजाइन क्षमता 345 एमएलडी है और यह UASB तकनीक पर आधारित है।
सीवरेज प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की ली जानकारी
अध्ययन दल ने प्लांट के निरीक्षण के दौरान लखनऊ में सीवरेज प्रबंधन, एसटीपी के संचालन, सीवेज उपचार की तकनीकी प्रक्रिया और शहरी सीवेज के प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।अधिकारियों ने लखनऊ में अपनाई जा रही सीवरेज उपचार व्यवस्था और उसके संचालन मॉडल के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अध्ययन दल का यह दौरा शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक और तकनीकी अनुभवों को समझने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रहा।
