महावीर जयंती: युद्ध और नफरत से जूझती दुनिया के लिए संजीवनी हैं भगवान महावीर के सिद्धांत

Mahavir Jayanti: Lord Mahavir's Principles Are a Lifeline for a World Grappling with War and Hatred.
 
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लेखक: अंजनी सक्सेना (विभूति फीचर्स)

संपादन: वेब डेस्क | 29 मार्च 2026

विश्व वंदनीय भगवान महावीर का जीवन और दर्शन किसी एक धर्म या संप्रदाय की जागीर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है। जिस दौर में दुनिया हिंसा और अत्याचार की आग में जल रही थी, उस समय महावीर स्वामी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाकर मानवता की रक्षा की। आज महावीर जयंती के अवसर पर उनके सिद्धांतों का पुनर्मूल्यांकन करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

'जैन' नहीं 'जिन' थे महावीर

भगवान महावीर का व्यक्तित्व विराट था। वे क्षत्रिय कुल में जन्मे राजकुमार थे, लेकिन उन्होंने कभी बाहरी विश्व को जीतने का सपना नहीं देखा। उन्होंने अपनी इंद्रियों और आंतरिक विकारों (काम, क्रोध, लोभ) पर विजय प्राप्त की।

  • जिन का अर्थ: 'जिन' वह है जिसने अपनी अंतरात्मा को जीत लिया हो। महावीर ने सिखाया कि असली वीर वह नहीं जो दूसरों को झुकाए, बल्कि वह है जो अपने भीतर छिपे शत्रुओं को परास्त करे। उनकी धर्मसभा (समवशरण) में हर जाति और वर्ग के लोग उन्हें सुनने आते थे, जो उनके समावेशी दृष्टिकोण का प्रमाण है।

'जियो और जीने दो': शांति का सार्वभौमिक मंत्र

भगवान महावीर ने 12 वर्ष से अधिक समय तक मौन और कठोर तपस्या कर 'कैवल्य ज्ञान' प्राप्त किया। उन्होंने दुनिया को 'जियो और जीने दो' का वह मंत्र दिया, जिसे आगे चलकर महात्मा गांधी ने अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया।

  • पाप से घृणा, पापी से नहीं: उनका दर्शन सिखाता है कि विरोधी को विरोध से नहीं, बल्कि सद्भावना और शांति से जीता जा सकता है। अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य—ये पांच ऐसे मार्ग हैं जो व्यक्ति को स्वकल्याण से सर्वकल्याण की ओर ले जाते हैं।

वर्तमान वैश्विक संकट और महावीर का दर्शन

आज जब दुनिया सत्ता और धन के अहंकार में डूबी है, तब महावीर के सिद्धांत और भी प्रासंगिक हो जाते हैं:

  1. कथनी और करनी में एकरूपता: वर्तमान राजनीति में राजनेताओं के शब्दों और कार्यों में बड़ा अंतर दिखता है। महावीर का जीवन सिखाता है कि आदर्श केवल बातों में नहीं, आचरण में होना चाहिए।

  2. हिंसा और नफरत का विकल्प: आज समाज में नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है। त्याग, सेवा और परोपकार के स्थान पर स्वार्थ हावी हो गया है। ऐसे में महावीर की करुणा ही समाज को टूटने से बचा सकती है।

  3. नई पीढ़ी और संस्कार: आधुनिकता की अंधी दौड़ में नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और जड़ों से विमुख हो रही है। उन्हें 'अपसंस्कारों' से बचाकर भगवान महावीर के बताए मार्ग पर लाना अनिवार्य है।

मानवता का कल्याण ही लक्ष्य

भारत की प्राचीन परंपरा कभी भी दूसरों की जान लेकर जीने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि अपनी आहुति देकर दूसरों की रक्षा करने की रही है। भगवान महावीर के सिद्धांतों पर चलकर ही हम न केवल अपनी विरासत को बचा सकते हैं, बल्कि विश्व में सुख और शांति की स्थापना भी कर सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में भगवान महावीर द्वारा दिखाए गए त्याग और संयम के मार्ग का अनुसरण करने में ही प्राणी मात्र का सच्चा कल्याण निहित है।

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