ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव: डीजल और एटीएफ पर राहत, पेट्रोल एक्सपोर्ट पर बढ़ी ड्यूटी; 1 जुलाई से नए नियम लागू
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राहत की खबर: डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में की गई भारी कटौती।
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घरेलू उपलब्धता पर जोर: देश के भीतर किल्लत रोकने के लिए पेट्रोल निर्यात पर ड्यूटी बढ़ाई गई।
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मित्र देशों को रियायत: नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बाद अब मॉरीशस और मालदीव को भी टैक्स से मिली विशेष छूट।
वैश्विक तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच केंद्र सरकार ने देश की तेल विपणन कंपनियों के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। मंगलवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को काफी कम कर दिया गया है।दूसरी ओर, घरेलू बाजार में आपूर्ति को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में बढ़ोतरी की है। टैक्स का यह नया ढांचा 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गया है।
स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) का नया गणित
मंत्रालय द्वारा हर पखवाड़े (Fortnightly) की जाने वाली नियमित समीक्षा के बाद स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की दरों को इस प्रकार संशोधित किया गया है:
| ईंधन का प्रकार | पुरानी टैक्स दर (प्रति लीटर) | नई टैक्स दर (प्रति लीटर) | बदलाव का स्वरूप |
| डीजल (Diesel) | ₹14 | ₹8.5 | 📉 ₹5.5 की कटौती |
| हवाई ईंधन (ATF) | ₹12.5 | ₹7.5 | 📉 ₹5.0 की कटौती |
| पेट्रोल (Petrol) | ₹1.5 | ₹4.0 | 📈 ₹2.5 की बढ़ोतरी |
आम जनता के लिए राहत: सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह कर संशोधन केवल विदेशी निर्यात (Export) पर लागू होगा। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा रिटेल कीमतों या ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
भू-राजनीतिक तनाव और फैसले की मुख्य वजह
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनजर घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमतौर पर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं, तो तेल रिफाइनिंग कंपनियां अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में घरेलू बाजार की अनदेखी कर विदेशों में भारी मात्रा में एक्सपोर्ट करने लगती हैं। पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को अत्यधिक निर्यात करने से हतोत्साहित करना है, ताकि देश के भीतर तेल की कमी न हो।
इन मित्र देशों को मिली टैक्स से विशेष रियायत
भारत सरकार ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighborhood First) नीति के तहत कई मित्र देशों को इस एक्सपोर्ट लेवी से पूरी तरह मुक्त रखा है। मार्च में जब यह टैक्स लागू किया गया था, तब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSUs) द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को भेजे जाने वाले ईंधन को इस दायरे से बाहर रखा गया था। सरकार ने अब इस रियायत का दायरा और व्यापक करते हुए इसमें मॉरीशस और मालदीव को भी शामिल कर लिया है, जिससे इन देशों को भारतीय तेल कंपनियों से बिना अतिरिक्त टैक्स के ईंधन मिलता रहेगा।
