फन रिपब्लिक मॉल में 'मैंगो फेस्टिवल' का शानदार समापन; आम के पराठे और चीज़केक के अनूठे स्वाद ने जीता लखनऊवासियों का दिल
अल्फांजो से लेकर दशहरी तक: आम की 30 अनूठी किस्मों का प्रदर्शन
मॉल में आयोजित इस फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण देश के विभिन्न कोनों से मंगवाई गई आम की लगभग 30 अनूठी और लोकप्रिय किस्में रहीं। यहाँ पहुंचे आम प्रेमियों को भारतीय बागवानी और कृषि की समृद्ध विरासत को करीब से देखने और चखने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी में बंगनपल्ली, अल्फांजो, तोतापुरी, सिंधुरा, मल्लिका, राम केला, लंगड़ा, चौसा, सफेदा, केसर और लखनऊ का शान माना जाने वाला दशहरी आम विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बने रहे।
👧 फैंसी ड्रेस में बच्चों ने बिखेरा रचनात्मकता का जलवा
उत्सव के दूसरे दिन बच्चों के भीतर छिपी बहुमुखी प्रतिभा को निखारने के लिए एक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 4 से 14 वर्ष तक के बच्चों ने हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने मंच पर आकर अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
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विशेष थीम: बच्चों ने परी, सूर्य, अंतरिक्ष और स्वयं आम का रूप धरकर दर्शकों की वाहवाही लूटी।
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सामाजिक संदेश: कुछ बच्चों ने पेड़ की वेशभूषा धारण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, तो कुछ ऐतिहासिक पात्र जैसे 'रानी पद्मावती' के रूप में नजर आए।
👩हेल्प 'कोल्ड कुकिंग' में महिलाओं ने पेश किए आम के फ्यूजन व्यंजन
समापन के मौके पर महिलाओं के लिए आयोजित की गई 'कोल्ड कुकिंग प्रतियोगिता' ने उत्सव में स्वाद का एक नया तड़का लगाया। इस प्रतियोगिता में हर उम्र की 100 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लेकर बिना आग के आम से बने बेहतरीन व्यंजनों का प्रदर्शन किया।
इस फेस्ट के दौरान लोगों ने आम के कुछ बेहद अनूठे और फ्यूजन रूपों का स्वाद चखा, जिसमें शामिल थे:
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मैंगो चाट और मैंगो दही भल्ले
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मैंगो चीज़केक और श्रीखंड
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मैंगो कुल्फी और मैंगो पराठा
💬 "स्वाद, परंपरा और पारिवारिक मिलन का संगम" — विकल्प सक्सेना
मॉल के जनरल मैनेजर (GM) श्री विकल्प सक्सेना ने कार्यक्रम की अपार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा आम सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति, बचपन की यादों और पारिवारिक उत्सवों का एक अहम हिस्सा है। हमारा उद्देश्य लखनऊ की जनता को एक ऐसा माहौल देना था, जहां स्वाद, परंपरा और मनोरंजन के साथ पूरा परिवार एक साथ समय बिता सके। बच्चों और महिलाओं की इस भारी भागीदारी ने इस इवेंट को ऐतिहासिक बना दिया है।"
तीन दिनों तक चला यह मैंगो फेस्टिवल केवल फलों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामुदायिक जुड़ाव, पारिवारिक मूल्यों और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लिया, जिसकी मिठास लखनऊ के लोगों के दिलों में लंबे समय तक बनी रहेगी।
