‘मन की बात’: जनता से सीधा संवाद, प्रेरणा और बदलाव का माध्यम

Mann Ki Baat: A medium for direct communication, inspiration and change with the public
 
‘मन की बात’: जनता से सीधा संवाद, प्रेरणा और बदलाव का माध्यम
हर महीने के आख़िरी रविवार को सुबह 11 बजे आकाशवाणी, दूरदर्शन और तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गूंजने वाली आवाज़ – “मेरे प्यारे देशवासियों” अब केवल एक संबोधन नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा और जनसंवाद का मंच बन चुका है। यह वही कार्यक्रम है जिसे हम सभी ‘मन की बात’ के नाम से जानते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के दिन शुरू किए गए इस कार्यक्रम ने आज अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं और सवा सौ से अधिक एपिसोड का सफल सफर तय कर लिया है।

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रेडियो को दिया नया जीवन

जब पूरी दुनिया डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर भाग रही थी, तब प्रधानमंत्री ने पारंपरिक माध्यम रेडियो को जनता से जुड़ने का जरिया बनाया। यह निर्णय शुरुआत में चौंकाने वाला जरूर था, लेकिन आज यह साबित हो चुका है कि रेडियो के माध्यम से देश के हर कोने तक सहज और सरल भाषा में संदेश पहुंचाना बेहद प्रभावी कदम रहा है।

लोगों से सीधे संवाद का सेतु

‘मन की बात’ केवल एकतरफा संवाद नहीं है। इसमें आम नागरिकों के पत्र, सुझाव और रिकॉर्ड किए गए संदेश भी शामिल किए जाते हैं। यही वजह है कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री और जनता के बीच भरोसे का एक मजबूत पुल बन गया है। 30 अप्रैल 2023 को इसने 100 एपिसोड पूरे किए थे और अब तक 126 से अधिक एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं।

लोकप्रियता और असर

भारतीय प्रबंध संस्थान, रोहतक के एक सर्वे के अनुसार, देश के लगभग 96% लोग ‘मन की बात’ के बारे में जानते हैं और करीब 23 करोड़ लोग इसे नियमित रूप से सुनते हैं। लगभग 41 करोड़ लोग समय-समय पर इससे जुड़ते हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल करोड़ों लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है, बल्कि रेडियो प्रसारण को भी नई पहचान दिलाई है।

समाज में बदलाव की मिसालें

‘मन की बात’ के जरिए कई ऐसे अभियानों को जन आंदोलन का रूप मिला है:

  • स्वच्छता अभियान: पहले एपिसोड से ही स्वच्छ भारत की अपील ने देशभर में सफाई को मिशन बना दिया।

  • वोकल फॉर लोकल और खादी को बढ़ावा: स्थानीय उद्योग और खादी को प्रोत्साहन देकर छोटे व्यवसायों को नई जान मिली।

  • खिलौना उद्योग: 2022 में घरेलू खिलौना उद्योग को समर्थन देने की अपील के बाद आज यह क्षेत्र 3000 करोड़ रुपए के निर्यात तक पहुंच चुका है।

  • पर्यावरण और जल संरक्षण: “एक पेड़ मां के नाम” और “जल शक्ति अभियान” जैसे अभियानों को भी इस कार्यक्रम ने गति दी।

संवाद शैली बनी लोकप्रियता का राज़

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मन की बात’ की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरल और आत्मीय भाषा है। यह कार्यक्रम लोगों को उसी तरह जोड़ता है जैसे दादी-नानी की कहानियां। इसके ज़रिए त्योहारों, परंपराओं, संस्कृति और समाज से जुड़े मुद्दों को सहज अंदाज में सामने रखा जाता है।

‘मन की बात’ केवल प्रधानमंत्री का संबोधन नहीं, बल्कि एक जनांदोलन और सकारात्मक सोच का मंच है। इसने रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम को नई ऊर्जा दी है और समाज में ठोस बदलाव लाने का जरिया बना है। स्वच्छता से लेकर आत्मनिर्भरता तक, इस कार्यक्रम ने भारतीय समाज को नई दिशा दी है। यही वजह है कि यह न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है।

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