मायावती का बड़ा बयान: “ब्राह्मणों को नहीं चाहिए किसी का बाटी-चोखा”

 
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आज की बड़ी खबर है बसपा सुप्रीमो मायावती  की, जिन्होंने 15 जनवरी 2026 को अपना 70वां जन्मदिन मनाया और लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सियासी हलचल मचा दी। बयान ऐसा कि यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया।
टाइटल है – “ब्राह्मणों को नहीं चाहिए किसी का बाटी-चोखा!”
अब सवाल ये है – क्या ये 2027 का सबसे बड़ा दांव है?

दोस्तों, मायावती जी का जन्मदिन बसपा में सिर्फ केक काटने का दिन नहीं होता। इसे जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर उन्होंने पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात की और यूपी की जनता को साफ-साफ राजनीतिक संदेश दिया।

सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं मायावती जी के ब्राह्मण समाज पर दिए गए बयान ने।
उन्होंने कहा –
“ब्राह्मणों को किसी का बाटी-चोखा नहीं चाहिए। उन्हें सम्मान चाहिए, उचित भागीदारी चाहिए और आजीविका के साधन चाहिए।”

मायावती जी ने सीधे तौर पर बीजेपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां ब्राह्मणों की उपेक्षा कर रही हैं और उनके साथ अन्याय हो रहा है।
जबकि बसपा ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया, सत्ता में हिस्सेदारी दी और कभी अपमान नहीं होने दिया।

मायावती जी ने ब्राह्मण समाज से अपील करते हुए कहा –
“कांग्रेस, सपा और भाजपा के बहकावे में मत आइए।
बसपा की सरकार बनी तो ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
सम्मान भी मिलेगा, प्रतिनिधित्व भी और हित भी सुरक्षित रहेंगे।”

ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब हाल ही में बीजेपी के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी।
मायावती जी ने साफ कहा –
“ब्राह्मणों को धमकियों से डरने की जरूरत नहीं है। बसपा उन्हें सच्चा सम्मान देगी।”

मायावती जी ने यादव समाज को लेकर भी बयान दिया।
उन्होंने कहा –
“हमने हमेशा यादव समाज के हितों का ध्यान रखा है और आगे भी रखते रहेंगे।”
लेकिन इसके साथ ही समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला भी किया।

मायावती जी ने कहा –
“सपा का शासन गुंडों और माफियाओं का शासन होता है।
उनके राज में दलित समाज को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है।”
उन्होंने महापुरुषों की मूर्तियों और दलित सम्मान पर हुए हमलों का भी जिक्र किया।

उन्होंने 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड को भी याद किया।
मायावती जी ने कहा कि उस दिन सपा के हजारों गुंडों ने सरकारी गेस्ट हाउस में उन पर जानलेवा हमला किया था।
ये घटना आज भी यूपी की राजनीति का काला अध्याय मानी जाती है।

अब सबसे बड़ा राजनीतिक बयान – 2027 विधानसभा चुनाव।
मायावती जी ने साफ कहा –
“बसपा चुनाव अकेले लड़ेगी।
गठबंधन से पार्टी को नुकसान होता है, वोट ट्रांसफर नहीं होता।”

हालांकि उन्होंने एक दरवाजा खुला भी छोड़ा।
कहा –
“अगर कोई ऐसा दल मिला जो ऊपरी जातियों के वोट बसपा को ट्रांसफर कर सके, तो उस पर विचार किया जा सकता है।”
लेकिन भरोसा पूरा है – बसपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।

दोस्तों, ये जन्मदिन सिर्फ सेलिब्रेशन नहीं था।
ये साफ संकेत था कि मायावती जी 2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला फिर से एक्टिव कर रही हैं –
ब्राह्मण + दलित + अन्य समाज!

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव ने मायावती जी को जन्मदिन की बधाई दी,
लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती जी ने सियासी तौर पर सभी को घेर लिया।

अब सवाल आपसे है –
क्या मायावती जी का ब्राह्मण कार्ड 2027 में चलेगा?
या ये सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है?
कमेंट में बताइए –
ब्राह्मणों को सम्मान चाहिए या बाटी-चोखा?

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