नगर निगम डिग्री कॉलेज में भर्ती अनियमितताओं पर मेयर ने बैठाई प्राचार्य की जांच

Mayor orders inquiry against Principal for recruitment irregularities at Municipal Degree College
 
Mayor orders inquiry against Principal for recruitment irregularities at Municipal Degree College
लखनऊ।  नगर निगम लखनऊ के एकमात्र डिग्री कॉलेज—इस्माईलगंज द्वितीय वार्ड स्थित अटल बिहारी वाजपेयी नगर निगम डिग्री कॉलेज में अतिथि प्रवक्ताओं की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुभाष चंद्र पाण्डेय पर लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगते रहे हैं। इन्हीं आरोपों को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने प्राचार्य के विरुद्ध जांच के आदेश दे दिए हैं।

भाजपा युवा मोर्चा महानगर के मंडल अध्यक्ष पुष्पेन्द्र वर्मा ने 10 सितंबर 2024 को महापौर से मिलकर ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया था कि कॉलेज में अतिथि व संविदा भर्तियों में भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने सभी भर्तियों पर रोक लगाने और कॉलेज को अनुदानित कराने की मांग भी की थी। यद्यपि भर्तियों पर तत्काल रोक नहीं लगी, लेकिन लगातार शिकायतें महापौर तक पहुंचती रहीं।

सूत्रों के अनुसार, 27 जनवरी को नगर निगम सदन में प्राचार्य को तलब किया गया था। सदन में पार्षद अरुण राय और रंजीत सिंह ने कॉलेज में हुई भर्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। आरोप है कि प्राचार्य ने यूजीसी मानकों की अनदेखी करते हुए पात्र अभ्यर्थियों के बावजूद दो विषयों में नेट/पीएचडी अर्हता रहित शिक्षकों की नियुक्ति की।
यूजीसी एवं उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के अनुसार, स्थायी और अतिथि शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता समान होती है तथा असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए यूजीसी नेट अथवा पीएचडी अनिवार्य है। इसके बावजूद, आरोप है कि व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी की गई।
इतना ही नहीं, आरोप है कि इंटरव्यू प्रक्रिया में भी अनियमितता बरती गई। प्राचार्य द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय के कथित परिचित प्रोफेसरों को बुलाकर इंटरव्यू का औपचारिक ड्रामा किया गया, जबकि विश्वविद्यालय द्वारा गठित कोई अधिकृत पैनल मौजूद नहीं था।
यूजीसी गाइडलाइन 2018 के अनुसार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की स्थिति में इंटरव्यू समिति में संबंधित वर्ग का प्रतिनिधि अनिवार्य होता है, लेकिन यहां अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिला अभ्यर्थियों के बावजूद समिति में कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं किया गया।
अंग्रेजी विषय में कॉलेज के एक सेवानिवृत्त शिक्षक को इंटरव्यू में शामिल कराए जाने और 16 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक को असफल घोषित करने का भी आरोप है, जो शासनादेश 2018 के विरुद्ध बताया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, प्राचार्य पर पिछले पांच वर्षों से कॉलेज के सुरक्षा गार्डों को अपनी निजी कार का चालक बनाए रखने, प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता करने तथा निजी वाहन के लिए नगर निगम से 100 लीटर पेट्रोल लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं।

जातिगत प्रताड़ना के भी आरोप

पिछले सप्ताह कॉलेज के कुछ शिक्षकों ने प्राचार्य पर व्यक्तिगत दुर्व्यवहार और जातिगत प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है। गत वर्ष भी पिछड़े वर्ग की एक महिला शिक्षिका द्वारा इसी प्रकार की शिकायत की गई थी।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, प्राचार्य के कार्यकाल में कॉलेज में प्रशासनिक अस्थिरता रही है और भर्तियों को लेकर लगातार विवाद बना रहा।

पद से हटाने की मांग

भर्ती अनियमितताओं का मुद्दा सबसे पहले उठाने वाले पुष्पेन्द्र वर्मा ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर मांग की है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्राचार्य को जांच अवधि में पद से हटाया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।

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