मेदांता में जटिल जीभ कैंसर सर्जरी के बाद बची बोलने-खाने की क्षमता, 6 साल बाद सामान्य जीवन जी रहा 37 वर्षीय मरीज
लखनऊ, 17 सितम्बर 2026। करीब 10 वर्षों से जीभ के बाईं ओर गांठ के साथ रह रहे 37 वर्षीय युवक की परेशानी उस समय गंभीर हो गई, जब गांठ कैंसर में बदल गई और बीमारी जीभ के अंदरूनी हिस्से तक फैल गई। मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ में की गई जटिल सर्जरी के बाद मरीज की बोलने और खाने की क्षमता को काफी हद तक बरकरार रखा गया। सर्जरी के छह साल बाद भी मरीज सामान्य जीवन जी रहा है और अपने काम पर लौट चुका है।
मरीज की जांच डॉ. विवेकानंद सिंह, डायरेक्टर, हेड एंड नेक कैंसर, मेदांता हॉस्पिटल और डॉ. पीयूष, कंसल्टेंट, हेड एंड नेक कैंसर, मेदांता हॉस्पिटल ने की। जांच में पता चला कि ट्यूमर जीभ के मध्य हिस्से से बढ़ते हुए निचले जबड़े की दिशा में फैल रहा था। एमआरआई में कैंसर के जीभ के नीचे मौजूद मांसपेशियों और मुंह के निचले हिस्से तक पहुंचने की जानकारी सामने आई।
कैंसर निकालने के साथ कार्यक्षमता बचाना थी चुनौती
इस मामले में डॉक्टरों के सामने चुनौती केवल कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाने तक सीमित नहीं थी। मरीज पेशे से सेल्सपर्सन है, जहां लोगों से बातचीत करना उसके काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए सर्जरी के बाद उसकी बोलने, खाने और सामान्य जीवन में लौटने की क्षमता को बनाए रखना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
मेदांता लखनऊ में सर्जरी के दौरान जीभ के कैंसर प्रभावित हिस्से को हटाया गया। इसके साथ ही गर्दन के उसी तरफ के लिम्फ नोड्स भी निकाले गए, जहां कैंसर के फैलने की पुष्टि हुई थी।
हाथ में पुरानी चोट के कारण अपनाई गई अलग तकनीक
सर्जरी के बाद जीभ के हटाए गए हिस्से का पुनर्निर्माण करना अगली बड़ी चुनौती थी। आमतौर पर ऐसी सर्जरी में हाथ के निचले हिस्से से टिश्यू लेकर जीभ का पुनर्निर्माण किया जाता है, लेकिन मरीज के हाथ में पहले चोट लग चुकी थी। इस वजह से डॉक्टरों ने ऊपरी बांह से टिश्यू लेकर जीभ के प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण किया।पुनर्निर्माण का उद्देश्य केवल सर्जरी से बनी खाली जगह को भरना नहीं था, बल्कि नई जीभ की संरचना को इस तरह तैयार करना था कि मरीज बोलने और खाने जैसे रोजमर्रा के जरूरी कार्यों को बेहतर तरीके से कर सके।
पांचवें दिन अस्पताल से मिली छुट्टी
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और उसे ऑपरेशन के पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद उसने धीरे-धीरे अपनी सामान्य गतिविधियां शुरू कीं और अपने काम पर वापस लौट गया। सर्जरी के छह साल बाद भी मरीज सामान्य जीवन जी रहा है। सेल्सपर्सन के रूप में बातचीत उसके पेशे का अहम हिस्सा है और वह अब लोगों से सामान्य रूप से बातचीत कर पा रहा है। उसकी आवाज भी लगभग सामान्य बताई गई है।
यह मामला सिर एवं गर्दन के कैंसर के उपचार में कैंसर नियंत्रण के साथ-साथ मरीज की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है। जटिल सर्जरी में कैंसरग्रस्त ऊतक को हटाने के साथ बोलने, खाने और दैनिक जीवन की गतिविधियों को यथासंभव बनाए रखने के लिए पुनर्निर्माण तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।
