मेदांता अस्पताल ने पूरे किए 1,000 रेडियोथेरेपी उपचार, कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद

छोटे ट्यूमर के लिए भी संभव हुआ सटीक इलाज

टीमवर्क और निरंतर मॉनिटरिंग से बेहतर परिणाम

 
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नीरज रस्तोगी ने बताया कि यहां उपचार के लिए आने वाले अधिकांश मरीज ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, लैरिंक्स कैंसर, एसोफैगस कैंसर और सर्विक्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं। इन बीमारियों का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थैरेपी के संयोजन से किया जाता है।  अत्याधुनिक तकनीक से कैंसर पर सटीक प्रहार  डॉ. रस्तोगी ने बताया कि मेदांता में विश्वस्तरीय मशीनों और आधुनिक तकनीक की मदद से कैंसर को लक्षित किया जाता है, साथ ही आसपास के स्वस्थ अंगों को भी बचाया जाता है।  गले के कैंसर के इलाज में लार ग्रंथियों की सुरक्षा की जाती है।  ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में डीप इंस्पिरेशन ब्रेथ होल्ड तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे दिल और फेफड़े रेडिएशन से सुरक्षित रहते हैं।  सर्विक्स कैंसर में ब्रैकीथेरेपी मशीन केवल ट्यूमर को टारगेट करती है, जिससे आसपास के अंगों को नुकसान नहीं पहुंचता।  छोटे ट्यूमर भी अब इलाज योग्य  उन्नत तकनीक की वजह से यहां 5 मिमी तक के छोटे ट्यूमर का भी सटीक इलाज संभव है। इससे मरीजों को कम साइड इफेक्ट्स और बेहतर परिणाम मिलते हैं।  कैंसर के स्टेज अनुसार सफलता दर  डॉ. रस्तोगी के अनुसार:  शुरुआती चरण (स्टेज 1) के मरीजों में 90% तक ठीक होने की संभावना रहती है।  तीसरे चरण (स्टेज 3) में यह संभावना 50-60% तक होती है।  चौथे चरण (स्टेज 4) में 10-15% मरीजों को लाभ मिलता है।  आंकड़े बताते हैं सफलता की कहानी  अब तक इलाज किए गए 1,000 मरीजों में:  50% मामले हेड और नेक कैंसर के थे (जिनमें तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट से होने वाले कैंसर प्रमुख हैं)।  30% मरीज ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थे।  शेष 20% मामलों में सर्विक्स, प्रोस्टेट, एसोफैगस, ब्लैडर, लैरिंक्स और ब्रेन ट्यूमर शामिल थे।  हर मरीज के लिए व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लान  इलाज शुरू करने से पहले प्रत्येक मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है, ताकि ट्यूमर की सटीक स्थिति का पता लगाया जा सके। इसके बाद डॉक्टरों की टीम एक पर्सनलाइज्ड रेडिएशन प्लान तैयार करती है। इलाज के दौरान लगातार मॉनिटरिंग और समय-समय पर वेरिफिकेशन सीटी स्कैन किया जाता है, जिससे मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद नतीजे मिलते हैं।
लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)। मेदांता अस्पताल, लखनऊ के कैंसर केयर विभाग ने रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। 28 जून 2023 को शुरू हुई रेडियोथेरेपी सेवाओं के तहत अब तक 1,000 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है।

रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नीरज रस्तोगी ने बताया कि यहां उपचार के लिए आने वाले अधिकांश मरीज ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, लैरिंक्स कैंसर, एसोफैगस कैंसर और सर्विक्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं। इन बीमारियों का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थैरेपी के संयोजन से किया जाता है।

अत्याधुनिक तकनीक से कैंसर पर सटीक प्रहार

डॉ. रस्तोगी ने बताया कि मेदांता में विश्वस्तरीय मशीनों और आधुनिक तकनीक की मदद से कैंसर को लक्षित किया जाता है, साथ ही आसपास के स्वस्थ अंगों को भी बचाया जाता है।

  • गले के कैंसर के इलाज में लार ग्रंथियों की सुरक्षा की जाती है।

  • ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में डीप इंस्पिरेशन ब्रेथ होल्ड तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे दिल और फेफड़े रेडिएशन से सुरक्षित रहते हैं।

  • सर्विक्स कैंसर में ब्रैकीथेरेपी मशीन केवल ट्यूमर को टारगेट करती है, जिससे आसपास के अंगों को नुकसान नहीं पहुंचता।

छोटे ट्यूमर भी अब इलाज योग्य

उन्नत तकनीक की वजह से यहां 5 मिमी तक के छोटे ट्यूमर का भी सटीक इलाज संभव है। इससे मरीजों को कम साइड इफेक्ट्स और बेहतर परिणाम मिलते हैं।

कैंसर के स्टेज अनुसार सफलता दर

डॉ. रस्तोगी के अनुसार:

  • शुरुआती चरण (स्टेज 1) के मरीजों में 90% तक ठीक होने की संभावना रहती है।

  • तीसरे चरण (स्टेज 3) में यह संभावना 50-60% तक होती है।

  • चौथे चरण (स्टेज 4) में 10-15% मरीजों को लाभ मिलता है।

आंकड़े बताते हैं सफलता की कहानी

अब तक इलाज किए गए 1,000 मरीजों में:

  • 50% मामले हेड और नेक कैंसर के थे (जिनमें तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट से होने वाले कैंसर प्रमुख हैं)।

  • 30% मरीज ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थे।

  • शेष 20% मामलों में सर्विक्स, प्रोस्टेट, एसोफैगस, ब्लैडर, लैरिंक्स और ब्रेन ट्यूमर शामिल थे।

हर मरीज के लिए व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लान

इलाज शुरू करने से पहले प्रत्येक मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है, ताकि ट्यूमर की सटीक स्थिति का पता लगाया जा सके। इसके बाद डॉक्टरों की टीम एक पर्सनलाइज्ड रेडिएशन प्लान तैयार करती है। इलाज के दौरान लगातार मॉनिटरिंग और समय-समय पर वेरिफिकेशन सीटी स्कैन किया जाता है, जिससे मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद नतीजे मिलते हैं।

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